बिलासपुर: गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी में आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान हिन्दी साहित्यकार और कथाकार मनोज रूपड़ा के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार ने अब व्यापक विरोध का रूप ले लिया है। इस घटना के खिलाफ एनएसयूआई, नागरिक मंच और प्रदेश के साहित्यकार खुलकर सामने आ गए हैं। सभी ने कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल को पद से हटाने की मांग की है।
एनएसयूआई का प्रदर्शन, यूनिवर्सिटी गेट पर पुतला दहन
शुक्रवार को छात्र संगठन एनएसयूआई ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर विरोध प्रदर्शन करते हुए कुलपति का पुतला फूंका। संगठन का आरोप है कि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली और गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी के हिन्दी विभाग के संयुक्त आयोजन में, कुलपति द्वारा असहमति जताने पर आमंत्रित वरिष्ठ साहित्यकार को सार्वजनिक रूप से अपमानित कर कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया।
शैक्षणिक गरिमा और सांस्कृतिक मूल्यों पर सवाल
एनएसयूआई पदाधिकारियों का कहना है कि यह घटना केवल एक साहित्यकार का अपमान नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा और ‘अतिथि देवो भवः’ जैसी भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं का खुला उल्लंघन है। संगठन ने आरोप लगाया कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में लगातार अव्यवस्था, प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं।
पुराने मामलों को भी जोड़ा गया विरोध से
एनएसयूआई ने छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही, फीस में लगातार बढ़ोतरी, नियुक्तियों में अनियमितता और छात्र अर्सलान अंसारी की मृत्यु जैसे मामलों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस विधायक ने की जांच और हटाने की मांग
इस पूरे प्रकरण पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कुलपति को पद से हटाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नागरिक मंच और साहित्यकारों का कलेक्टोरेट मार्च
वहीं, नागरिक मंच बिलासपुर और स्थानीय साहित्यकारों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर जिला प्रशासन को कुलाधिपति राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में आमंत्रित अतिथि लेखक के साथ इस तरह का व्यवहार निंदनीय और अक्षम्य है।
राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील
साहित्यकारों का कहना है कि इस घटना से देशभर के लेखकों और संस्कृतिकर्मियों में रोष है। उन्होंने राष्ट्रपति से मामले का संज्ञान लेकर कुलपति को पद से मुक्त करने की अनुशंसा करने की मांग की है, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और अकादमिक माहौल की रक्षा हो सके।