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आलू के दाम में भारी गिरावट: 20 साल में पहली बार थोक कीमत 7 रुपये किलो

आलू के दाम में भारी गिरावट: 20 साल में पहली बार थोक कीमत 7 रुपये किलो

देशभर में इस साल आलू की रिकॉर्ड पैदावार होने से बाजार में कीमतें जमीन पर आ गई हैं। हालात यह हैं कि थोक बाजार में आलू के दाम करीब 7 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम बताए जा रहे हैं। उत्पादन बढ़ने और निर्यात ठप होने के कारण किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

डेढ़ गुना उत्पादन बना कीमत गिरने की बड़ी वजह

इस बार आलू की फसल पिछले साल की तुलना में करीब डेढ़ गुना ज्यादा हुई है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में भारी उत्पादन हुआ है, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई है। ज्यादा आवक के कारण कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

खाड़ी देशों में निर्यात बंद, बढ़ा स्टॉक

अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के चलते इस बार खाड़ी देशों में आलू का निर्यात लगभग बंद हो गया है। निर्यात रुकने से देश में ही स्टॉक बढ़ गया, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा है।

भाड़ा महंगा, मुनाफा खत्म

व्यापारियों के मुताबिक, बंगाल से आलू 4 से 4.50 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है, लेकिन परिवहन लागत करीब 2.50 रुपए प्रति किलो पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय बाजार में आलू 6.5 से 7 रुपए प्रति किलो पहुंच रहा है। कम मांग के कारण थोक व्यापारी भी इसे लगभग बिना मुनाफे के बेचने को मजबूर हैं।

थोक में सस्ता, खुदरा में महंगा

जहां थोक बाजार में आलू सस्ते दाम पर बिक रहा है, वहीं खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। सब्जी मंडियों में आलू 15 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि ठेले और अन्य दुकानों पर यह 20 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है।

क्षेत्र के हिसाब से अलग मांग

रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग में पश्चिम बंगाल के आलू ज्यादा पसंद किए जाते हैं, जबकि बिलासपुर और सरगुजा संभाग में उत्तर प्रदेश के आलू की मांग अधिक रहती है। इन दोनों राज्यों में इस बार उत्पादन अधिक होने से स्थानीय बाजार भी प्रभावित हुए हैं।

20 साल में पहली बार इतने कम दाम

भनपुरी आलू-प्याज मंडी के अध्यक्ष अजय अग्रवाल के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में पहली बार आलू के दाम इतने नीचे आए हैं। आमतौर पर अच्छी क्वालिटी का आलू थोक में 10 से 12 रुपए प्रति किलो बिकता था, लेकिन इस बार कीमतें 7 रुपए तक गिर गई हैं।

किसानों और व्यापारियों पर दोहरी मार

कीमतों में भारी गिरावट से किसानों को उनकी लागत तक निकालना मुश्किल हो गया है, वहीं व्यापारियों का मुनाफा भी लगभग खत्म हो गया है। कुल मिलाकर, बंपर उत्पादन इस बार राहत की बजाय संकट बन गया है।


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