नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में इसी महीने मंत्रिपरिषद के स्तर पर बड़े बदलाव की चर्चाओं ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि कैबिनेट में फेरबदल के साथ कई मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। चर्चा है कि दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों की समीक्षा कर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। संभावित बदलाव को आगामी विधानसभा चुनावों, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के साथ-साथ एनडीए के सहयोगी दलों की अपेक्षाओं को भी इस कवायद में ध्यान में रखा जा सकता है।
पीयूष गोयल के विभाग में बदलाव की संभावना कम
कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को लेकर स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट मानी जा रही है। भाजपा संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने के बावजूद उनके वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में बने रहने की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विभिन्न देशों के साथ चल रही महत्वपूर्ण वार्ताओं को देखते हुए उनके मंत्रालय में तत्काल बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्तर पर ही होगा।
हरदीप सिंह पुरी को लेकर भी निगाहें
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं चल रही हैं। उनके राज्यसभा कार्यकाल की आगामी स्थिति को देखते हुए यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि उन्हें आगे भी मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी मिलती है या नहीं। यदि समीकरण बदलते हैं तो कैबिनेट में सिख प्रतिनिधित्व को लेकर भी नए विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। वहीं महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिहाज से राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर का नाम भी संभावित चेहरों की चर्चा में बताया जा रहा है।
सहयोगी दलों की मांग से बढ़ेगी हलचल
एनडीए के सहयोगी दल भी संभावित फेरबदल में अहम भूमिका निभा सकते हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान की ओर से मौजूदा खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से बड़ी जिम्मेदारी की अपेक्षा की चर्चा है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट की ओर से भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर अटकलें हैं। ऐसे में महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को साधना भी संभावित फेरबदल का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
DMK की एंट्री की चर्चा ने बढ़ाई सियासी दिलचस्पी
संभावित कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं में तमिलनाडु का समीकरण भी खासा महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। द्रमुक (DMK) को केंद्र की सत्ता में सहयोगी बनाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। हालांकि इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए DMK के केंद्र सरकार में शामिल होने की खबरों को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
यूपी चुनाव से पहले बदल सकते हैं समीकरण
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के लिए राज्य का राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बेहद अहम है। इसी वजह से यूपी से किसी बड़े चेहरे को केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की संभावना की चर्चा हो रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के नाम संभावित बदलावों को लेकर चर्चा में हैं। इनमें ओबीसी राजनीति और संगठनात्मक समीकरणों के लिहाज से केशव प्रसाद मौर्य का नाम विशेष रूप से चर्चा में बताया जा रहा है।
हिमाचल के नेताओं को लेकर भी नजर
हिमाचल प्रदेश से केंद्रीय राजनीति में जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर जैसे प्रमुख चेहरे पहले से ही महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। आगामी राजनीतिक जरूरतों और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए इनके विभागों या जिम्मेदारियों को लेकर भी बदलाव की संभावना पर नजर रखी जा रही है।
अंतिम फैसला प्रधानमंत्री के स्तर पर
फिलहाल कैबिनेट फेरबदल को लेकर सामने आ रही अधिकांश जानकारियां राजनीतिक सूत्रों और संभावनाओं पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व की ओर से इस संबंध में आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। अगर फेरबदल होता है तो इसका असर केवल मंत्रियों के विभागों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा और एनडीए के व्यापक राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।