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झारखंड में 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द: भड़के सफल अभ्यर्थी; रांची सचिवालय में घुसकर किया घेराव

झारखंड में 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द: भड़के सफल अभ्यर्थी; रांची सचिवालय में घुसकर किया घेराव

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद अब और तेज हो गया है। करीब 26 दिनों तक चले छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) की भूमिका से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है।

सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही वर्ष 2014 से अब तक आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने का आदेश भी जारी किया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है, जो इन परीक्षाओं में सफल होकर अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं।

कैबिनेट के फैसले के बाद भड़का चयनित अभ्यर्थियों का गुस्सा

कैबिनेट बैठक के बाद मंगलवार देर रात सरकार की ओर से अधिसूचना जारी की गई। इसके बाद पहले से चयनित अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई। बुधवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी विरोध करते हुए राज्य सचिवालय परिसर तक पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को पार करते हुए सचिवालय परिसर में प्रवेश किया और सरकार से परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग की। सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) के पद पर कार्यरत चंदन कुमार और श्याम सुंदर मंडल समेत अन्य चयनित अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों मेहनत की है और मेरिट के आधार पर चयन हासिल किया है।

‘एजेंसी की गलती की सजा चयनित अभ्यर्थियों को क्यों?’

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर परीक्षा प्रक्रिया में किसी आउटसोर्स एजेंसी या अन्य स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि किसी एजेंसी की कथित अनियमितता के लिए उन उम्मीदवारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी हासिल की है। अभ्यर्थी रद्द किए गए आदेश पर सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।

सचिवालय में निषेधाज्ञा, पुलिस ने दी कार्रवाई की चेतावनी

चयनित अभ्यर्थियों के सचिवालय परिसर में पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। हटिया के डीएसपी नीरज कुमार ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने की अपील की। पुलिस की ओर से बताया गया कि सचिवालय क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। ऐसे में परिसर के अंदर प्रदर्शन या घेराव करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियमों का पालन करने और परिसर से बाहर जाने की चेतावनी दी।

सरकार ने क्यों रद्द की 22 परीक्षाएं?

झारखंड सरकार के मुताबिक भर्ती परीक्षाओं के संचालन में शामिल टीडीपीएल एजेंसी की भूमिका को लेकर सवाल सामने आए हैं। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे को बनाए रखने के लिए कड़ा कदम उठाना जरूरी था। सरकार ने जहां 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है, वहीं वर्ष 2014 से अब तक आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की भी उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

मंत्री ने कहा- युवाओं का भरोसा बहाल करना जरूरी

झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कैबिनेट के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल एजेंसी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता युवाओं का संस्थानों पर भरोसा बनाए रखना है। सरकार का दावा है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

अब चयनित अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल

सरकार के फैसले से जहां परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की जांच का रास्ता साफ हुआ है, वहीं पहले से चयनित और नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार की उच्चस्तरीय जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।


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