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शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त: राज्य सरकार को लगाई फटकार, नई मेरिट लिस्ट बनाने के दिए आदेश...

शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी पर हाईकोर्ट सख्त: राज्य सरकार को लगाई फटकार, नई मेरिट लिस्ट बनाने के दिए आदेश...

बिलासपुर। राज्य में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को 90 दिनों के भीतर नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षित पदों पर तय सीमा से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों की नियुक्ति केवल योग्यता के आधार पर करना नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे आरक्षण व्यवस्था का उल्लंघन माना। यह मामला जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच में सुना गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और मेरिट सूची की समीक्षा की।

शिक्षक के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी 

दरअसल, वर्ष 2019 में राज्य सरकार ने व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। भर्ती प्रक्रिया में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार भी शामिल थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद ओबीसी वर्ग के पदों पर दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन निर्धारित 7 प्रतिशत सीमा से कहीं अधिक कर लिया गया। इससे सामान्य ओबीसी अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए।

व्याख्याता बायोलॉजी ई-संवर्ग के पदों का मामला बना विवाद की वजह

याचिका में विशेष रूप से व्याख्याता बायोलॉजी ई-संवर्ग भर्ती का उल्लेख किया गया। बताया गया कि इस संवर्ग में कुल 200 पदों पर भर्ती होनी थी। नियमानुसार ओबीसी वर्ग के हिस्से में आने वाले पदों में से केवल 14 पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए जा सकते थे, लेकिन चयन सूची में इससे अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों को शामिल कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने इसे आरक्षण नियमों का उल्लंघन बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरी चयन प्रक्रिया की समीक्षा करने और नियमानुसार नई मेरिट सूची तैयार करने का आदेश दिया।

90 दिनों में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिया है कि पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी की जाए। अदालत के इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों पर असर पड़ सकता है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य की सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।


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