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गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, कई इलाकों में ब्लैकआउट; फैक्ट्रियों का काम ठप

गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से हाहाकार, कई इलाकों में ब्लैकआउट; फैक्ट्रियों का काम ठप

हरियाणा की आर्थिक राजधानी गुरुग्राम में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब आम लोगों और औद्योगिक इकाइयों पर दिखाई देने लगा है। शहर के कई रिहायशी सेक्टरों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली संकट के कारण फैक्ट्रियों का कामकाज भी प्रभावित होने की खबर है। बिजली आपूर्ति कब सामान्य होगी, इसे लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।

बिजली संकट के बीच कई जगहों पर नाराज लोग सड़कों पर उतर आए हैं। स्थिति को देखते हुए जिले के बिजली सब-स्टेशनों और पावर हाउसों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। संभावित तोड़फोड़ और अन्य अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

गुरुग्राम में बिजली संकट से आम जनता और उद्योग परेशान

बिजली आपूर्ति बाधित होने से गुरुग्राम के कई रिहायशी इलाकों में लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। लंबे समय तक बिजली नहीं रहने के कारण घरेलू कामकाज के साथ-साथ अन्य जरूरी गतिविधियों में भी दिक्कतें आ रही हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर-37 की फैक्ट्रियों में काम प्रभावित होने से कारोबारियों और श्रमिकों की चिंता बढ़ गई है। बिजली बहाली को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से लोगों की परेशानी और बढ़ रही है।

प्रशासन ने संवेदनशील बिजली केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है, ताकि हड़ताल के दौरान बिजली ढांचे को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और कानून-व्यवस्था बनी रहे।

बिजली वितरण के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल

हरियाणा बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों का मुख्य विरोध हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के उस फैसले को लेकर है, जिसके तहत इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिया गया है।

कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि समानांतर लाइसेंस देने का फैसला बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि निजी कंपनी को औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में बिजली वितरण का अवसर मिलने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की आय प्रभावित हो सकती है।

कर्मचारियों को आशंका है कि इससे सरकारी बिजली निगम की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ेगा। इसी फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

HERC के आदेश के खिलाफ राज्यभर में प्रदर्शन

निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए हैं। विरोध के दौरान HERC के आदेश की प्रतियां जलाई गईं। इसके अलावा केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और HERC अध्यक्ष मुकेश गर्ग के पुतले जलाकर भी नाराजगी जाहिर की गई।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा के भविष्य को लेकर लिए गए फैसले पर पुनर्विचार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले में कानूनी और नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप करने की मांग की है।

अनिल विज ने दिया कानूनी लड़ाई का भरोसा

हड़ताल से पहले बिजली कर्मचारी प्रतिनिधियों ने हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज से मुलाकात की थी। बैठक के बाद विज ने कहा कि राज्य सरकार ने खुद बिजली वितरण के लिए आवेदन आमंत्रित नहीं किए थे और सरकार इस आदेश के खिलाफ है।

उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि सरकार पांच से छह दिनों के भीतर अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में अपील दायर कर आदेश पर रोक लगाने की मांग करेगी। जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात भी कही गई।

सरकार के इस रुख से कर्मचारियों को कानूनी लड़ाई के जरिए राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बिजली आपूर्ति पर हड़ताल के तत्काल प्रभाव को लेकर उपभोक्ताओं की चिंता बनी हुई है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हड़ताल वापस लेने की अपील की

बिजली संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके मुद्दों पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह विकल्प भी दिया कि कर्मचारी अपनी पसंद के वकीलों के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ सकते हैं।

सैनी ने बिजली कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारी सीजन के दौरान आम लोगों को बिजली संकट के कारण परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अब बिजली बहाली और हड़ताल खत्म होने पर टिकी नजरें

गुरुग्राम में बिजली आपूर्ति बाधित होने से रिहायशी इलाकों के साथ औद्योगिक गतिविधियों पर भी दबाव बढ़ रहा है। एक ओर कर्मचारी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता जल्द से जल्द बिजली बहाल होने की उम्मीद कर रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति कब बनेगी और गुरुग्राम में बिजली आपूर्ति कब सामान्य होगी। फिलहाल, इस पूरे विवाद का समाधान सरकार की कानूनी कार्रवाई और कर्मचारी संगठनों के अगले कदम पर निर्भर करेगा।


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