मुकेश शर्मा, शाजापुर : जिले के सिहोदा-खेड़ा गांव में शासकीय तालाब के पानी के उपयोग को लेकर किसानों और गांव के कुछ लोगों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार दोपहर बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और एसडीएम मनीषा वास्कले को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्या बताई। किसानों का आरोप है कि सिंचाई के लिए तालाब का पानी लेने से उन्हें रोका जा रहा है और विरोध करने पर जान से मारने की धमकियां भी दी गई हैं।
किसानों ने बताया कि...
किसानों ने बताया कि सिहोदा गांव में स्थित उनकी कृषि भूमि में इस समय गेहूं की फसल खड़ी है, जिसे सिंचाई की तत्काल जरूरत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष शासन द्वारा सिंचाई विभाग के माध्यम से गांव में एक बांध (डेम) का निर्माण कराया गया था, जिसका उद्देश्य सभी किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। शुरुआत में बांध का पानी सभी किसान उपयोग कर रहे थे।
ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि अब सरपंच अशोक पिता दयाराम और उनके कुछ समर्थकों ने बांध के पानी पर अपना एकाधिकार कर लिया है। किसानों का कहना है कि 9 जनवरी को जब वे सिंचाई के लिए बांध पर पहुंचे, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और बंदूक दिखाकर डराया गया।
सूखने लगी हमारी फसलें...
किसानों ने यह भी बताया कि सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे राजस्व अधिकारियों ने स्पष्ट किया था कि शासकीय बांध के पानी पर सभी किसानों का समान अधिकार है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष ने अधिकारियों की बात मानने से इनकार कर दिया। किसानों का आरोप है कि बांध में पर्याप्त पानी मौजूद होने के बावजूद गेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे उनकी फसलें सूखने की स्थिति में पहुंच गई हैं। पीड़ित किसानों ने एसडीएम से मांग की है कि विवाद खड़ा करने वाले लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए और तत्काल सभी किसानों को बांध का पानी उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी गेहूं की फसल को बचाया जा सके।