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बिना आवेदन शिक्षिका के नाम पर 23.07 लाख का पर्सनल लोन! हाईकोर्ट ने बैंकिंग लोकपाल को 30 दिन में फैसला लेने कहा

बिना आवेदन शिक्षिका के नाम पर 23.07 लाख का पर्सनल लोन! हाईकोर्ट ने बैंकिंग लोकपाल को 30 दिन में फैसला लेने कहा

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका के नाम पर कथित तौर पर बिना ऋण आवेदन किए 23.07 लाख रुपये के पर्सनल लोन स्वीकृत और वितरित किए जाने के मामले में अहम निर्देश दिए हैं। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने बैंकिंग लोकपाल को मामले की शिकायत पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि जब तक बैंकिंग लोकपाल मामले में फैसला नहीं लेता, तब तक संबंधित बैंक शिक्षिका के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं करेंगे। हाईकोर्ट के इस निर्देश से याचिकाकर्ता को फिलहाल राहत मिली है।

शिक्षिका के नाम पर बिना आवेदन लोन का आरोप

कांकेर जिले के नरहरपुर निवासी 36 वर्षीय शिक्षिका सुधा कौशल, पति यशवंत सिंह लात्रे ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उनकी ओर से किसी तरह का ऋण आवेदन किए बिना उनके नाम पर यस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक से कुल 23 लाख 7 हजार रुपये के कई पर्सनल लोन स्वीकृत कर दिए गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्हें इन ऋणों के बारे में बाद में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने संबंधित बैंकों के समक्ष मामला उठाया और कथित धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस में भी दर्ज कराई।

OTP के आधार पर लोन देने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि बैंक की आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए बिना केवल OTP के आधार पर पर्सनल लोन स्वीकृत और वितरित कर दिए गए। शिक्षिका की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उन्होंने इन ऋणों के लिए आवेदन ही नहीं किया था। मामले की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस में भी शिकायत की गई। याचिका के अनुसार, इस मामले में थाना कोतवाली रायपुर और थाना कांकेर में 8 अप्रैल 2025 को अपराध दर्ज किया गया था।

बैंकिंग लोकपाल के पास भी पहुंचा मामला

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि बैंकिंग लोकपाल के समक्ष भी शिकायत की गई थी। हाईकोर्ट ने मामले को बैंकिंग लोकपाल के समक्ष रखने का निर्देश देते हुए शिक्षिका को 15 दिनों के भीतर आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर स्थित बैंकिंग लोकपाल के समक्ष अपनी शिकायत प्रस्तुत करने को कहा है। कोर्ट ने बैंकिंग लोकपाल को शिकायत मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर मामले पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

फैसला आने तक बैंक नहीं कर सकेंगे कार्रवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग लोकपाल के निर्णय तक संबंधित बैंक याचिकाकर्ता शिक्षिका के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। इससे शिक्षिका को कथित ऋण और बैंक की ओर से की जा रही कार्रवाई के कारण तत्काल राहत मिली है। याचिकाकर्ता ने खुद को कम वेतन पाने वाली कर्मचारी बताते हुए कहा कि कथित तौर पर उनके नाम पर लिए गए ऋण और बैंक की कार्रवाई के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

अब बैंकिंग लोकपाल के फैसले पर नजर

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब मामले की अगली दिशा बैंकिंग लोकपाल के निर्णय पर निर्भर करेगी। लोकपाल के समक्ष शिक्षिका को अपनी शिकायत और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद 30 दिनों के भीतर मामले पर निर्णय लिया जाना है। मामले में कथित रूप से बिना आवेदन लोन स्वीकृत किए जाने, OTP के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने और बैंकिंग प्रक्रिया में हुई संभावित गड़बड़ी जैसे आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी।


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