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छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी पर एसीबी का शिकंजा, 29 महीनों में 161 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में रिश्वतखोरी पर एसीबी का शिकंजा, 29 महीनों में 161 अधिकारी-कर्मचारी गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई लगातार जारी है। जनवरी 2024 से मई 2026 तक एसीबी ने 128 ट्रैप कार्रवाई करते हुए 161 सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। इन कार्रवाइयों के दौरान 45 लाख रुपये से अधिक की रिश्वत राशि भी जब्त की गई। आंकड़े बताते हैं कि आम लोगों से सीधे जुड़े विभागों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सबसे ज्यादा सामने आई हैं।

जमीन, पेंशन और भुगतान से जुड़े मामलों में शिकायतें

एसीबी को मिली शिकायतों में जमीन नामांतरण, सीमांकन, राजस्व रिकॉर्ड सुधार, मुआवजा भुगतान, निर्माण कार्यों के बिल पास कराने, पेंशन और ग्रेच्युटी की फाइलों को आगे बढ़ाने जैसे मामलों में रिश्वत मांगने की बात सामने आई। इसके अलावा बिजली कनेक्शन और अन्य सरकारी सेवाओं के लिए भी अवैध रकम की मांग की शिकायतें दर्ज हुईं।

छोटे कर्मचारी ही नहीं, बड़े अधिकारी भी कार्रवाई के दायरे में

भ्रष्टाचार के मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारी भी एसीबी के शिकंजे में आए हैं। कार्रवाई के दौरान एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, पुलिस अधिकारी, निरीक्षक, सब-इंस्पेक्टर और विभिन्न विभागों के इंजीनियर रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं। इससे साफ है कि भ्रष्टाचार की समस्या कई स्तरों तक फैली हुई है।

राजस्व और पुलिस विभाग पर सबसे ज्यादा आरोप

एसीबी रिकॉर्ड के अनुसार राजस्व विभाग में सबसे अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। जमीन से जुड़े कार्यों में फाइल आगे बढ़ाने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के बदले रिश्वत मांगने के कई मामले सामने आए। वहीं पुलिस विभाग से जुड़े मामलों में कार्रवाई को प्रभावित करने, जब्त वाहन छोड़ने और प्रकरण में राहत दिलाने के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें मिलीं।

कई जिलों में सामने आए अधिक मामले

रिश्वतखोरी के मामलों में सूरजपुर, सरगुजा, रायपुर, रायगढ़, मुंगेली और बिलासपुर जैसे जिले प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इन जिलों में एसीबी ने कई ट्रैप कार्रवाई कर अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है।

केवल गिरफ्तारी नहीं, व्यवस्था सुधारने की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए केवल ट्रैप कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। जब तक आम नागरिक बिना रिश्वत दिए अपने काम आसानी से नहीं करा पाएंगे, तब तक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को पूरी तरह सफल नहीं माना जा सकता।

एसीबी के आंकड़े

ट्रैप कार्रवाई : 128
गिरफ्तार अधिकारी-कर्मचारी : 161
जब्त रिश्वत राशि : ₹45.38 लाख से अधिक
कार्रवाई वाले विभाग : 27
अवधि : जनवरी 2024 से मई 2026 तक

इस अवधि के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई भले तेज हुई हो, लेकिन सरकारी तंत्र में रिश्वतखोरी की समस्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।


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