रायपुर। बिजली विभाग में कार्यरत 2471 से अधिक संविदा कर्मचारियों ने अपनी एक सूत्रीय मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारी नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं और रिक्त पदों पर नियमित समायोजन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह जोखिम भरे कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी नियुक्ति का लाभ नहीं मिला।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसी क्रम में उन्होंने जल समाधि आंदोलन की भी घोषणा की है।
वर्षों से कर रहे जोखिम भरा काम
संविदा कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से बिजली विभाग में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। शुरुआत में उन्हें केवल मैदानी कार्यों की जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में हाई वोल्टेज लाइनों पर चढ़कर काम करने और अन्य जोखिमपूर्ण जिम्मेदारियां भी सौंप दी गईं। कर्मचारियों का आरोप है कि जिम्मेदारियां तो नियमित कर्मचारियों जैसी हैं, लेकिन सुविधाएं और अधिकार नहीं दिए जा रहे।
43 कर्मचारियों की जा चुकी है जान
आंदोलन कर रहे कर्मचारियों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 100 संविदा कर्मचारी कार्य के दौरान हादसों का शिकार हुए, जिनमें 43 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है। इनमें कई मामलों में बिजली से जुड़े हादसे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि दुर्घटना के बाद प्रभावित परिवारों को सहायता दिलाने के लिए भी कई बार आंदोलन करना पड़ा।
नई एचआर नीति पर भी जताई नाराजगी
कर्मचारियों ने नई एचआर नीति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हाल ही में लागू नीति के तहत संविदा कर्मचारियों को लाइन परमिट जारी करने जैसी अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी दी गई हैं। उनका तर्क है कि जब विभाग नियमित कर्मचारियों जैसा पूरा कार्य करा रहा है तो वेतन, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी उसी स्तर की मिलनी चाहिए।
8 हजार पद खाली, फिर भी नहीं हो रही भर्ती
आंदोलनरत कर्मचारियों का कहना है कि बिजली कंपनियों में करीब 8 हजार पद खाली हैं, लेकिन नियमित भर्ती नहीं की जा रही। विभाग का अधिकांश काम संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे संचालित हो रहा है। उनका आरोप है कि इससे न केवल कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है, बल्कि बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
कम बीमा और सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
संविदा कर्मचारी संघ का कहना है कि हाई रिस्क कार्य करने के बावजूद दुर्घटना की स्थिति में केवल 4 लाख रुपये का बीमा मिलता है, जो जोखिम के मुकाबले बेहद कम है। कर्मचारियों ने बेहतर बीमा, सुरक्षा उपकरण और नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं देने की मांग की है।
दुर्घटना के बाद कर्मचारियों पर ही आती है जिम्मेदारी
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार उन्हें मौखिक निर्देशों के आधार पर जोखिम भरे कार्य करने के लिए भेजा जाता है। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना हो जाती है तो पूरी जिम्मेदारी संविदा कर्मचारी पर डाल दी जाती है। उनका कहना है कि जब तक नियमितीकरण, सुरक्षा और अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।