नारायणपुर : छत्तीसगढ़ में इन दिनों 'ऑपरेशन' और 'ढेर' करने वाले वाक्य हमेशा नक्सल विरोधी अभियान में सुनने को मिलते रहते हैं लेकिन यह वाक्य अगर ग्रामीणों की जुबां से किसी सड़क के कुत्ते की मौत पर किया जाएं तो मामला बड़ा दिलचस्प हो जाता हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं नक्सल हिंसा से प्रभावित छोटेडोंगर गांव में हुए एक ऐसे 50 घंटे के ऑपरेशन की जिसमें एक हिंसक स्ट्रीट डॉग को पुलिस और ग्रामीणों की घेराबंदी के बाद ढेर कर दिया गया। पागल या हिंसक होकर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों पर हमला करने की वजह से इस गांव के दस लोग पीड़ित बताएं जा रहे हैं।
कुत्ते के आंतक से दहशत :
दो दिनों से कुत्ते के हमला करने की खबरों से तंग आकर ग्रामीणों के द्वारा स्थानीय पुलिस की मदद से एक ऑपरेशन चलाया गया था जिसमें हिंसक कुत्ते को मार कर ग्रामीणों के द्वारा राहत की सांस की गई। इस मामले छोटेडोंगर के ग्रामीण संतोष मजूमदार ने बताया कि पिछले दो दिनों से पागल कुत्ते के आंतक से ग्रामीणों में दहशत फैला हुआ था। पागल कुत्ते के हमलों से बच्चों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया था।
ग्रामीणों की मदद से किया रैस्क्यू :
इसकी जानकारी पुलिस को लगते ही छोटेडोंगर पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से पागल कुत्ते का रैस्क्यू किया। इस आपरेशन में पुलिस जवानों सहित लगभग पच्चीस ग्रामीण पागल कुत्ते की खोजबीन में जुटे हुए थे। सुबह 7 बजे से छोटेडोंगर के गली मोहल्ले में पागल कुत्ते का सामना होने के बाद काफी जद्दोजहद करते हुए आखिरकार पागल कुत्ते को मार दिया गया। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से पागल कुत्ते ने स्कूली बच्चों सहित दस ग्रामीणों पर हमला किया था। पागल कुत्ते को मारने के बाद स्कूलों बच्चों व ग्रामीणों के द्वारा राहत की सांस ली जा रही हैं।