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आदिम जाति विकास विभाग में कर्मचारियों को हटाने का विवाद, सीएम से निष्पक्ष जांच की मांग

आदिम जाति विकास विभाग में कर्मचारियों को हटाने का विवाद, सीएम से निष्पक्ष जांच की मांग

राहुल यादव- लोरमी।  छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रमों और छात्रावासों में कार्यरत अस्थायी (मौखिक) कर्मचारियों को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रभावित कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें बिना किसी लिखित आदेश और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए कार्य से अलग कर दिया गया। इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को हटाने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2008, 2012 और 2015 से लगातार आश्रमों एवं छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारियों को अचानक कार्यमुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, उनका मानदेय भी रोक दिया गया, जिससे कई परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

आरोप है कि पुराने कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह नए लोगों से काम कराया जा रहा है, जबकि इस संबंध में किसी प्रकार की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

नई नियुक्तियों पर उठे सवाल

शिकायत में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी की गई और इसमें आर्थिक अनियमितताओं की भी आशंका है।

उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही नई नियुक्तियों से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

पुनः नियुक्ति और लंबित मानदेय की मांग

प्रभावित कर्मचारियों ने जांच पूरी होने तक उन्हें दोबारा कार्य पर रखने और रुका हुआ मानदेय जारी करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बाद अचानक हटाया जाना उनके साथ अन्याय है।

विश्व आदिवासी दिवस पर आवेदन लिए जाएंगे

लोरमी आदिवासी समाज के अध्यक्ष गिरीश ध्रुव ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर प्रभावित कर्मचारियों से आवेदन लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सभी मामलों को संकलित कर शासन के समक्ष रखा जाएगा और कर्मचारियों को नियमानुसार न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।

विभाग की ओर से नहीं आया आधिकारिक जवाब

फिलहाल आदिम जाति विकास विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।


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