सोमा शर्मा- गरियाबंद। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को न्यायालय से मुआवजा मिलने का आदेश तो हो गया, लेकिन राशि का भुगतान लंबे समय तक नहीं हुआ। आखिरकार मामले में कोर्ट को सख्त कदम उठाना पड़ा। 9 लाख 71 हजार रुपये के मुआवजे की अदायगी नहीं होने पर न्यायालय ने आदिवासी विकास विभाग के खिलाफ कुर्की वारंट जारी कर दिया। वारंट लेकर न्यायालय का मचकुरी अमला विभागीय कार्यालय पहुंचा तो अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई। हालांकि, बाद में विभागीय अधिकारियों और न्यायालय के अमले के बीच हुई बातचीत के बाद फिलहाल कुर्की की कार्रवाई टाल दी गई है।
2022 के सड़क हादसे से जुड़ा है मामला
पूरा मामला वर्ष 2022 में हुए सड़क हादसे से संबंधित बताया जा रहा है। हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसके आश्रित परिवार ने मुआवजे के लिए न्यायालय की शरण ली थी। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मृतक के परिवार को 9.71 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश के बावजूद तय राशि का भुगतान नहीं होने पर मामला आगे बढ़ता गया।
भुगतान नहीं हुआ तो कोर्ट ने जारी किया कुर्की वारंट
लंबे समय तक मुआवजे की रकम नहीं मिलने पर न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया। आदेश की अनुपालना नहीं होने के चलते आदिवासी विकास विभाग के खिलाफ कुर्की वारंट जारी कर दिया गया। न्यायालय के निर्देश पर मचकुरी अमला वारंट लेकर विभागीय कार्यालय पहुंचा। जैसे ही अमले के पहुंचने की जानकारी विभागीय अधिकारियों को मिली, कार्यालय में हलचल बढ़ गई।
कुर्की से पहले बनी सहमति
कुर्की की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही विभागीय अधिकारियों और न्यायालय के अमले के बीच बातचीत हुई। बताया जा रहा है कि मुआवजा राशि के भुगतान के लिए विभाग को कुछ अतिरिक्त समय देने पर सहमति बनी। इसके बाद फिलहाल विभाग के खिलाफ होने वाली कुर्की की कार्रवाई रोक दी गई।
तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो फिर होगी कार्रवाई
मामले में विभाग को अब मृतक के आश्रित परिवार को मुआवजा राशि का भुगतान करने के लिए कुछ दिनों का समय मिला है। हालांकि, यह राहत फिलहाल अस्थायी है। यदि निर्धारित समय के भीतर 9.71 लाख रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो न्यायालय की ओर से दोबारा कुर्की की कार्रवाई की जा सकती है।
परिवार को अब भुगतान का इंतजार
सड़क हादसे में परिवार के सदस्य को खोने के बाद आश्रितों ने न्यायालय के माध्यम से मुआवजे की लड़ाई लड़ी। कोर्ट से उनके पक्ष में आदेश आने के बावजूद राशि मिलने में हुई देरी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग तय समय-सीमा के भीतर न्यायालय के आदेश का पालन करता है या नहीं।