रीवा के सगरा क्षेत्र के बड़ियांन टोला में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद 9 परिवारों के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनके पुराने मकानों के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए कुछ मकान भी तोड़ दिए गए। अब बरसात के मौसम में परिवारों को तिरपाल के सहारे खुले में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
परिवारों का कहना है कि बारिश के बीच बच्चों और बुजुर्गों के साथ खुले में रहना बेहद मुश्किल हो गया है। आसपास की जमीन में कीचड़ और पानी जमा होने से परेशानी बढ़ गई है। वहीं, रात के समय सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का खतरा भी बना हुआ है।
कार्रवाई के बाद तिरपाल बना परिवारों का सहारा
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में विश्वकर्मा परिवार समेत कुल 9 परिवार शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ये परिवार लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे थे।
कार्रवाई के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को जमीन उपलब्ध कराने के साथ एक-एक बरसाती दिए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल परिवार इसी अस्थायी व्यवस्था के सहारे अपना जीवन गुजार रहे हैं।
लगातार बारिश के कारण अस्थायी ठिकानों के आसपास की जमीन दलदली हो गई है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
पीड़ितों का दावा- प्रधानमंत्री आवास भी टूटे
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकान भी गिराए गए। परिवारों का कहना है कि मकान टूटने के बाद उनके पास सुरक्षित तरीके से रहने के लिए कोई पक्का ठिकाना नहीं बचा है।
पीड़ितों के मुताबिक, बरसात के मौसम में तिरपाल के नीचे रहना बेहद चुनौतीपूर्ण है। बारिश के अलावा जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी लगातार बना रहता है।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बढ़ी चिंता
पीड़ित मोहनलाल विश्वकर्मा ने प्रशासन से प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित रहने की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खुले स्थान पर रहना काफी मुश्किल हो रहा है।
वहीं, राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि मकान हटाए जाने के बाद परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने मांग की कि स्थायी आवास की व्यवस्था होने तक प्रशासन सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराए।
परिवारों ने मांगी तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था
प्रभावित 9 परिवारों ने प्रशासन से बरसात को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक आवास या सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में तिरपाल के नीचे रहना लंबे समय तक संभव नहीं है।
परिवारों का कहना है कि उन्हें बच्चों, बुजुर्गों और सामान की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। अब उनकी नजर प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत और स्थायी आवास व्यवस्था पर है।