रायपुर: प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के जरिए आम लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। डॉक्टरों की तैनाती में असमानता के कारण कई स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरत से ज्यादा चिकित्सक पदस्थ हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण केंद्रों में गंभीर कमी बनी हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण मरीजों पर पड़ रहा है।
रायपुर जिले में प्राथमिक से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों की पदस्थापना में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े अस्पतालों की ओर न जाना पड़े, इस उद्देश्य से PHC और CHC बनाए गए थे, लेकिन इन केंद्रों में पर्याप्त डॉक्टर नहीं होने से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
कहीं डॉक्टरों की भरमार, कहीं इलाज मुश्किल
नवा रायपुर स्थित राखी क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बेड (वर्तमान में 50 बेड) वाले अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यहां पांच चिकित्सा अधिकारी और सात संविदा डॉक्टर पदस्थ हैं। इसके उलट सरोना में स्वीकृत 100 बेड वाले अस्पताल में सभी 15 डॉक्टर पद खाली हैं।
धरसींवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 14 पद स्वीकृत होने के बावजूद केवल 6 डॉक्टर ही सेवाएं दे रहे हैं। वहीं अभनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 16 डॉक्टरों के कार्यभार को महज 2 चिकित्सक संभाल रहे हैं। मंदिर हसौद CHC में भी स्वीकृत पद होने के बावजूद स्थायी डॉक्टरों की कमी के चलते संविदा डॉक्टरों के भरोसे व्यवस्था चलाई जा रही है।
शहरी क्षेत्रों में अधिक बांडेड डॉक्टर
शासकीय मेडिकल कॉलेजों से पढ़ाई पूरी करने वाले बांडेड चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती अधिकतर शहरी इलाकों में की जा रही है। हमर क्लीनिक, हमर अस्पताल और जिला अस्पताल जैसे संस्थानों में इनकी ड्यूटी लगाई जाती है, जबकि ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों के कई स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं।
विशेष अस्पताल भी डॉक्टरों के बिना
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पंड़री में संचालित 100 बेड के लेप्रोसी होम एंड हॉस्पिटल में डॉक्टरों के पद ही स्वीकृत नहीं किए गए हैं। स्टेट लेप्रोसी यूनिट में तीन स्वीकृत पदों पर डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि मानसिक चिकित्सालय में 12 पद स्वीकृत होने के बावजूद एक भी नियमित डॉक्टर पदस्थ नहीं है। दूसरी ओर, विधानसभा, एमएलए रेस्ट हाउस, राजभवन और मंत्रालय की डिस्पेंसरी में निर्धारित संख्या के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
कई स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह डॉक्टर विहीन
जिले के कई स्वास्थ्य केंद्र ऐसे भी हैं, जहां डॉक्टरों के पद स्वीकृत होने के बावजूद एक भी चिकित्सक नियुक्त नहीं किया जा सका है। सीएचसी बिरगांव में तीन में से सिर्फ एक डॉक्टर कार्यरत है, जबकि आरंग में तीन पदों के मुकाबले दो डॉक्टर पदस्थ हैं। परसदा, मानिकचौरी, उपरवारा, तोरला और खोरपा जैसे स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह डॉक्टर विहीन हैं और वहां इलाज अन्य स्टाफ या संविदा व्यवस्था के सहारे चल रहा है।
स्वास्थ्य जानकारों का कहना है कि यदि डॉक्टरों की तैनाती का संतुलन सही ढंग से नहीं किया गया, तो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और खराब हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य विभाग प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टरों का पुनर्विन्यास करे, ताकि ग्रामीण और जरूरतमंद इलाकों में भी मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।