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Lok Sabha में 2004 के बाद पहली बार PM के स्पीच बिना धन्यवाद प्रस्ताव पास: राहुल गांधी को लेकर विपक्ष का हंगामा...

Lok Sabha में 2004 के बाद पहली बार PM के स्पीच बिना धन्यवाद प्रस्ताव पास: राहुल गांधी को लेकर विपक्ष का हंगामा...

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही पारित हो गया। वर्ष 2004 के बाद यह पहली बार है कि धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के जवाब के पास हुआ है। उस समय विपक्ष ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बोलने नहीं दिया था।

विपक्षी सांसदों ने की जोरदार नारेबाजी:

गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी की। हंगामे के चलते स्पीकर ओम बिरला को कुछ ही मिनटों में कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद सदन फिर शुरू हुआ, लेकिन लगातार विरोध के कारण लोकसभा को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

राहुल गांधी को बोलने नहीं देने पर टकराव:

कांग्रेस के निलंबित सांसद मणिक्कम टैगोर ने स्पष्ट कहा कि जब तक लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी, तब तक विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सदन में बोलने नहीं देगा। उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया की निंदा की। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शशि थरूर ने भी राहुल गांधी को बोलने देने की मांग उठाई। थरूर, जो पैर में चोट के कारण व्हीलचेयर पर संसद पहुंचे, ने कहा कि किसी सांसद को अपनी बात रखने से रोकना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।

लोकसभा में महिला सांसदों का विरोध, PM का संबोधन टला:

बुधवार शाम को जब प्रधानमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देने वाले थे, तब विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्तापक्ष की सीटों के पास पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। पीएम की सीट के आसपास भी नारेबाजी और पोस्टर प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई और प्रधानमंत्री का संबोधन टल गया। स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि ऐसी घटना सदन के इतिहास में पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि संभावित अप्रिय स्थिति टालने के लिए प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया गया था।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी उठा विवाद:

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा और किसानों के हितों को लेकर चिंता जताई। वहीं, आरजेडी सांसद मनोज झा ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि हालिया घटनाक्रम ने लोकतांत्रिक चर्चा की स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। सत्तापक्ष की ओर से सुधांशु त्रिवेदी और जेपी नड्डा ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि संसदीय नियमों और परंपराओं का पालन जरूरी है।

राज्यसभा में भी हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट:

लोकसभा विवाद की गूंज राज्यसभा में भी सुनाई दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन उपसभापति ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट कर दिया।

क्यों खास है यह घटनाक्रम?

2004 के बाद पहली बार PM के बिना धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया है, राहुल गांधी को बोलने नहीं देने पर संसद में तीखा टकराव देखने को मिला है। इसके साथ ही  लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में काफी हंगामा हुआ है, बता दें कि  बजट सत्र के दौरान राजनीतिक तनाव चरम पर है। यह पूरा घटनाक्रम संसद की कार्यवाही, विपक्ष-सत्तापक्ष संबंधों और संसदीय परंपराओं पर गंभीर बहस को जन्म दे रहा है। अगर आप चाहें तो मैं इसी खबर के लिए वेब स्टोरी, सोशल मीडिया कैप्शन, या ब्रेकिंग न्यूज़ शॉर्ट वर्ज़न भी तैयार कर सकती हूँ। 


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