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Ghaziabad triple suicide case: के-पॉप और ऑनलाइन गेमिंग की लत ने ली 3 बहनों की जान, सुसाइड नोट में चौंकाने वाले खुलासे...

Ghaziabad triple suicide case: के-पॉप और ऑनलाइन गेमिंग की लत ने ली 3 बहनों की जान, सुसाइड नोट में चौंकाने वाले खुलासे...

Ghaziabad triple suicide case: गाजियाबाद जिले के थाना टीला मोड़ इलाके की भारत सिटी सोसाइटी उस वक्त चीखों से गूंज उठी, जब एक साथ तीन सगी बहनों ने मौत को गले लगा लिया. इन तीन बहनों ने सोसाइटी की 9वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी है, ये घटना सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि काफी दुखद और हैरान कर देने वाली है। पुलिस जांच में ये बात सामने आईं है कि प्राची, पाखी और निशिका के सपनों में भी ‘कोरियन लाइफस्टाइल’ घर कर चुकी थी। इस मामले में एक पॉकेट डायरी से पुलिस को आठ पन्नों का सुसाइड नोट मिला है। इस नोट ने डिजिटल दुनिया, के-पॉप संस्कृति के प्रति अत्यधिक जुनून और ऑनलाइन एडिक्शन से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। 

‘सॉरी पापा… हम खुद को कोरियाई मानते हैं’:

पुलिस को मिली इस पॉकेट डायरी में आठ पन्नों का विस्तृत सुसाइड नोट लिखा हुआ है। सुसाइड नोट की शुरुआत पिता से माफी मांगते हुए की गई है। बहनों ने लिखा कि वे मानसिक रूप से खुद को कोरियाई मानती थीं और किसी भारतीय से शादी की कल्पना नहीं कर सकती थीं। परिवार द्वारा शादी की बात छेड़े जाने के बाद वे और अधिक तनाव में चली गईं।

परिवार से दूरी, काल्पनिक दुनिया से जुड़ाव:

डायरी में लिखा गया है कि वे घरवालों की डांट-फटकार से परेशान थीं और के-पॉप कलाकारों व विदेशी कंटेंट से गहरा लगाव महसूस करती थीं। उन्होंने यहां तक लिखा कि उन्हें परिवार से ज्यादा के-पॉप सितारे प्रिय हैं और वास्तविक दुनिया में वे खुद को फिट नहीं पाती थीं।

गेम्स, ड्रामा और सोशल मीडिया का गहरा असर:

इस सुसाइड नोट में कोरियन ड्रामा, विदेशी कलाकारों, डरावने मोबाइल गेम्स, एनीमेशन कैरेक्टर और यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर्स की लंबी सूची दर्ज है। जांच में सामने आया कि तीनों बहनें घंटों ऑनलाइन रहती थीं और सोशल मीडिया के जरिए बाहरी लोगों से संपर्क में भी थीं, जिससे उनका सामाजिक अलगाव बढ़ता गया।

पुलिस की साइबर जांच जारी:

घटना के बाद पुलिस ने मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। साइबर सेल यह पता लगाने में जुटी है कि क्या लड़कियों को किसी तरह उकसाया गया, ब्लैकमेल किया गया या वे किसी संदिग्ध ऑनलाइन ग्रुप से जुड़ी थीं। फिलहाल सुसाइड नोट में किसी बाहरी व्यक्ति पर सीधे आरोप का जिक्र नहीं मिला है।

परिवार सदमे में, इलाके में शोक:

इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है। पड़ोस और सोसाइटी के लोग भी स्तब्ध हैं। किसी को अंदाजा नहीं था कि डिजिटल दुनिया की लत इतनी भयावह त्रासदी का कारण बन सकती है।

ऑनलाइन एडिक्शन पर फिर उठे सवाल:

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और किशोरों में बढ़ती स्क्रीन-डिपेंडेंसी, पहचान संकट और सोशल आइसोलेशन गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या बनते जा रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के साथ संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते ऐसे खतरों को रोका जा सके।


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