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Parliament Budget Session: राज्यसभा में PM मोदी का जवाब, विपक्ष का वॉकआउट बोले-‘मौका गंवाने वालों पर देश कैसे करेगा भरोसा’

Parliament Budget Session: राज्यसभा में PM मोदी का जवाब, विपक्ष का वॉकआउट बोले-‘मौका गंवाने वालों पर देश कैसे करेगा भरोसा’

Parliament Budget Session Live: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने के लिए खड़े हुए। प्रधानमंत्री के संबोधन के बीच विपक्षी दलों के सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए वेल में प्रवेश किया और हंगामा शुरू कर दिया। लगातार विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपना भाषण जारी रखा, जबकि कुछ देर बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

हंगामे के बीच जारी रहा प्रधानमंत्री का संबोधन:

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष के विरोध पर हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का उल्लेख किया और कहा कि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें बैठे-बैठे भी नारे लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस टिप्पणी के बाद सदन में शोर-शराबा और बढ़ गया, लेकिन प्रधानमंत्री बिना रुके अपना जवाब देते रहे। विपक्ष के वॉकआउट पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जो लोग थक गए, वे चले गए, लेकिन कभी न कभी उन्हें जवाब देना ही पड़ेगा।” इस दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर प्रधानमंत्री का समर्थन किया।

“देश को न रुकना है, न पीछे मुड़कर देखना है”:

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि भारत तेज गति से विकास और कम महंगाई—दोनों के साथ आगे बढ़ रहा है, जो विश्व स्तर पर कम ही देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत कभी “फ्रेजाइल फाइव” अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और बहुत जल्द तीसरे स्थान पर पहुंचने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—देश को निरंतर आगे बढ़ाना है और विकास की गति को बनाए रखना है। “हमें न रुकना है, न पीछे मुड़कर देखना है, बल्कि लक्ष्य हासिल करना है,” प्रधानमंत्री ने कहा।

बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका:

कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक व्यवस्था में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया उम्मीद और भरोसे के साथ भारत की ओर देख रही है। उन्होंने भारत को “ग्लोबल साउथ” की सशक्त आवाज बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की उद्यमिता, स्टार्टअप इकोसिस्टम और एमएसएमई नेटवर्क पर वैश्विक भरोसा मजबूत हुआ है। उनके अनुसार, यही ताकतें भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे ले जा रही हैं।

कांग्रेस पर साधा निशाना:

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में पूर्ववर्ती सरकारों, खासकर कांग्रेस, पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले शासन में वोटबैंक की राजनीति हावी रही और दूरदर्शी सोच का अभाव था। उन्होंने कहा कि पिछली नीतियों की कमियों को दूर करने में वर्तमान सरकार की काफी ऊर्जा लगी, लेकिन अब देश नई दिशा में आगे बढ़ चुका है। उन्होंने लाल किले से दिए गए पुराने प्रधानमंत्रियों के भाषणों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि उनका विश्लेषण किया जाए तो विजन की कमी साफ नजर आती है। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार दीर्घकालिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

राज्यसभा और लोकसभा-दोनों सदनों में टकराव:

प्रधानमंत्री के भाषण से पहले राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। खड़गे ने लोकसभा में एक दिन पहले हुई कार्यवाही का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। इस पर नड्डा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि दूसरे सदन की कार्यवाही का उल्लेख यहां नहीं किया जा सकता। उधर लोकसभा में भी हंगामे का असर देखने को मिला। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों के विरोध के कारण सदन को पहले स्थगित करना पड़ा। बाद में दोबारा शुरू होने पर भी शोर-शराबा जारी रहा, जिसके बीच धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

राजनीतिक संदेश और आगे की राह:

प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब भर नहीं था, बल्कि इसमें आगामी वर्षों के लिए सरकार की आर्थिक और वैश्विक प्राथमिकताओं का संकेत भी दिखा। वहीं विपक्ष का वॉकआउट यह दर्शाता है कि बजट सत्र के शेष दिनों में संसद के भीतर टकराव जारी रह सकता है। कुल मिलाकर, राज्यसभा की यह कार्यवाही एक ओर भारत की विकास यात्रा और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं पर केंद्रित रही, तो दूसरी ओर घरेलू राजनीति के तीखे स्वर भी सामने आए। आने वाले दिनों में बजट सत्र की बहसें और राजनीतिक रणनीतियां देश की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

प्रधानमंत्री का विपक्ष पर तीखा हमला:

संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। पीएम के भाषण के दौरान विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष की अनुपस्थिति में अपना संबोधन जारी रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने चर्चा का अवसर गंवा दिया है और अब देश उनके ऊपर कैसे भरोसा करेगा। उन्होंने सदन में चर्चा के स्तर को और ऊंचा होने की जरूरत भी बताई।

वैश्वि क ट्रेड डील और युवाओं के अवसरों का जिक्र:

पीएम मोदी ने हाल की अंतरराष्ट्रीय ट्रेड डील्स का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोपीय यूनियन तक भारत की सराहना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता को लेकर चिंता पहले की तुलना में कम हुई है और दुनिया का बाजार अब भारतीय युवाओं के लिए खुल चुका है।

कांग्रेस पर तीखा हमला, रिफॉर्म्स और बैंकिंग सुधारों का जिक्र:

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास न इच्छाशक्ति थी और न ही स्पष्ट नीति। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले बड़े-बड़े लोन फोन कॉल पर दिए जाते थे और एनपीए लगातार बढ़ रहा था, जबकि वर्तमान सरकार के सुधारों के बाद एनपीए एक फीसदी से भी नीचे आ गया है। उन्होंने बिना गारंटी मुद्रा लोन, सार्वजनिक उपक्रमों के रिकॉर्ड मुनाफे और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने का भी उल्लेख किया। साथ ही किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को लगभग चार लाख करोड़ रुपये भेजे जाने की बात कही।

योजना आयोग से नीति आयोग तक का बदलाव:

पीएम मोदी ने पूर्व व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लंबे समय तक पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग योजनाएं बनाने में बाधाएं थीं। 2014 में सरकार बनने के बाद योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया, जो अब तेज गति से काम कर रहा है।

विपक्षी दलों और राज्यों की सरकारों पर आरोप:

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और वाम दलों पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद उन्होंने नागरिकों के जीवन में अपेक्षित बदलाव नहीं किए और उनकी प्राथमिकता केवल सत्ता और स्वार्थ तक सीमित रही।

सदन में पहले भी हुआ हंगामा:

इससे पहले राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस हुई। वहीं लोकसभा में भी हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी थी। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने ध्वनिमत से धन्यवाद प्रस्ताव पारित करा दिया।


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