मोहम्मद हसन // रायपुर: छत्तीसगढ़ के तिल्दा में पेंड्रावन जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में चूना पत्थर खनन की अनुमति के खिलाफ किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार, 5 नवंबर को पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने रैली निकालकर विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया और खनन की अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की।
संघर्ष समिति ने प्रमुख अभियंता के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया कि किसानों के भारी विरोध के बावजूद जल संसाधन विभाग ने 23 जुलाई 2025 को अल्ट्राटेक सीमेंट कंपनी को 1722 एकड़ क्षेत्र में लाइमस्टोन माइनिंग के लिए दोबारा एनओसी जारी कर दी। समिति का कहना है कि यह फैसला जलाशय की सुरक्षा को खतरे में डालने वाला है और इससे क्षेत्र के किसानों के हित प्रभावित होंगे।
हाईकोर्ट के आदेश को लेकर उठाए सवाल
किसान संघर्ष समिति ने एनओसी जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। समिति के मुताबिक, 25 अप्रैल 2024 को हाईकोर्ट ने शासन को निर्देश दिया था कि यदि विभाग एनओसी पर दोबारा विचार करता है तो इसके लिए उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया जाए। यह समिति जलाशय पर खनन के संभावित प्रभावों की समीक्षा करेगी। संघर्ष समिति का आरोप है कि कोर्ट ने दोबारा एनओसी जारी करने के लिए कोई बाध्यता नहीं रखी थी, इसके बावजूद विभाग ने अनुमति जारी कर दी।
तकनीकी समिति की अनुशंसा पर भी उठे सवाल
ज्ञापन में बताया गया कि जल संसाधन विभाग ने पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने 18 सितंबर 2024 को बंगोली रेस्ट हाउस में पेंड्रावन जलाशय बचाओ किसान संघर्ष समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। समिति का आरोप है कि स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद खनन प्रस्ताव के पक्ष में एनओसी की अनुशंसा की गई। किसानों ने इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कंपनी और अधिकारियों के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया है।
डेम सेफ्टी बोर्ड की रिपोर्ट का दिया हवाला
संघर्ष समिति ने डेम सेफ्टी बोर्ड की 4 मई 2025 को भेजी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें IIT रुड़की के अध्ययन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। समिति के अनुसार, अध्ययन से संबंधित पूर्व सहमति और टर्म्स ऑफ रेफरेंस डेम सेफ्टी बोर्ड के साथ साझा नहीं किए गए थे। ज्ञापन में दावा किया गया कि रिपोर्ट में खनन से पेंड्रावन जलाशय के अस्तित्व पर गंभीर खतरा होने की बात कही गई है।
एनओसी निरस्त नहीं हुई तो होगा चक्काजाम
किसान संघर्ष समिति ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि पेंड्रावन जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र में खनन के लिए जारी एनओसी निरस्त नहीं की गई तो रायपुर-बालोदाबाजार सड़क मार्ग पर चक्काजाम किया जाएगा। समिति ने जलाशय के संरक्षण और किसानों के हित में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
प्रदर्शन में पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल सहित आलोक शुक्ला, उधोराम वर्मा, अनिल नायक, घनश्याम वर्मा, कुंजलाल वर्मा, मनहरण वर्मा, प्रदीप मढ़रिया, हेमंत ठाकुर, देवव्रत नायक, प्रकाश सागरवंशी, अंकित वर्मा समेत बड़ी संख्या में किसान और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए।