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तूता गांव में कारण बताओ नोटिस पर NRDA की सफाई, कहा- फिलहाल विस्थापन की कोई कार्रवाई नहीं

तूता गांव में कारण बताओ नोटिस पर NRDA की सफाई, कहा- फिलहाल विस्थापन की कोई कार्रवाई नहीं

रायपुर। राजधानी रायपुर के तूता गांव में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद ग्रामीणों में विस्थापन की आशंकाएं बढ़ने लगी थीं। इस बीच नया रायपुर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वर्तमान में गांव में किसी भी व्यक्ति को हटाने या विस्थापित करने की कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। प्राधिकरण के मुताबिक यह प्रक्रिया केवल प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक जांच का हिस्सा है और अभी तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।

अतिक्रमण की शिकायतों के बाद जारी किए गए नोटिस

NRDA के अनुसार ग्राम तूता में अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों की जांच के लिए अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया। जांच के बाद नियमानुसार संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, ताकि उनका पक्ष भी सुना जा सके। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने का अर्थ यह नहीं है कि तत्काल अतिक्रमण हटाने या लोगों को विस्थापित करने की कार्रवाई की जा रही है।

ग्रामीणों से चर्चा कर निकाला जाएगा समाधान

प्राधिकरण ने बताया कि 2 जुलाई 2026 को गांव के प्रतिनिधियों और समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मुलाकात कर अपनी चिंताएं साझा की थीं। बैठक में यह तय किया गया कि जल्द ही सभी संबंधित पक्षों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चर्चा कर आम सहमति बनाने का प्रयास होगा, ताकि सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित समाधान निकाला जा सके।

ग्राम पंचायत भी कर चुकी है कार्रवाई की मांग

NRDA ने यह भी बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से समय-समय पर गांव के अलग-अलग हिस्सों से अतिक्रमण हटाने के संबंध में पत्र भेजे जाते रहे हैं। इन्हीं शिकायतों और पंचायत के पत्रों के आधार पर नियमानुसार नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाई गई है। प्राधिकरण का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर और निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।

विकास के साथ ग्रामीणों के हितों का भी रहेगा ध्यान

NRDA ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस मामले में जो भी निर्णय लिए जाएंगे, वे पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ होंगे। विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीणों के अधिकारों और सार्वजनिक हित दोनों का संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।


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