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कांगेर घाटी में ईको-टूरिज्म को नई रफ्तार: वन मंत्री केदार कश्यप और डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने संभावनाओं को सराहा...

कांगेर घाटी में ईको-टूरिज्म को नई रफ्तार: वन मंत्री केदार कश्यप और डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने संभावनाओं को सराहा...

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जैव विविधता क्षेत्र कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में वन मंत्री केदार कश्यप और हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ईको-टूरिज्म, स्थानीय आजीविका और समुदाय आधारित विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

पारंपरिक स्वागत और सांस्कृतिक प्रस्तुति:

उद्यान पहुंचने पर वन मंत्री और डॉ. द्विवेदी का मैदानी कर्मचारियों एवं ईको-विकास समिति के सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया। स्थानीय ईको-विकास समिति द्वारा आदिवासी सांस्कृतिक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसने बस्तर की समृद्ध परंपराओं की जीवंत झलक पेश की। कार्यक्रम में उद्यान के निदेशक नवीन कुमार, एसडीओ कमल तिवारी, परिक्षेत्र अधिकारी कोटमसर और कोलेंग सहित बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ग्रामीणों से संवाद, समस्याओं पर चर्चा:

दौरे के दौरान वन मंत्री और प्रधान संपादक ने उद्यान क्षेत्र का भ्रमण किया तथा ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना। इसके बाद अतिथियों ने स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। उन्होंने कहा कि कांगेर घाटी क्षेत्र में ईको-टूरिज्म और आजीविका संवर्धन की अपार संभावनाएं हैं, जिनका सुनियोजित विकास किया जाना चाहिए।

पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा, समितियों को मिली पैडल बोट:

ईको-विकास समिति तीरथगढ़ एवं मांझीपाल को पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए पैडल बोट प्रदान की गईं। इस पहल से क्षेत्र में पर्यटन को नई दिशा मिलने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही, विभिन्न ईको-विकास समितियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया गया।

संरक्षण और विकास में संतुलन पर जोर:

वन मंत्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं को व्यापक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार कांगेर घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर सकारात्मक पहल करती रहेगी। समुदाय की सक्रिय भागीदारी को संरक्षण की आधारशिला बताते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के साथ समन्वित विकास को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

पर्यटन और आजीविका को मिलेगी नई गति:

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के समन्वित मॉडल को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो बस्तर क्षेत्र में पर्यटन और आजीविका दोनों को नई गति मिल सकती है।



 



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