होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

'शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, राष्ट्र का चरित्र भी गढ़ते हैं' – राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बोले डॉ. हिमांशु द्विवेदी

'शिक्षक केवल पढ़ाते नहीं, राष्ट्र का चरित्र भी गढ़ते हैं' – राष्ट्रीय सम्मान समारोह में बोले डॉ. हिमांशु द्विवेदी

रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के तत्वावधान में स्व. हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026 का आयोजन बुधवार को राजधानी रायपुर के शांति नगर स्थित विमतारा भवन में किया गया। देशभर से चयनित उत्कृष्ट शिक्षकों को शिक्षा, नवाचार, सामाजिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

'शिक्षक ही राष्ट्र के भविष्य के निर्माता'

अपने संबोधन में डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का प्रमाण है कि राजा भी अपने गुरु के सम्मान के लिए हर प्रकार का त्याग करने को तैयार रहते थे। उनका मानना है कि एक शिक्षक केवल विद्यार्थियों को शिक्षा नहीं देता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य, संस्कृति और चरित्र का निर्माण भी करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों द्वारा स्वयं शिक्षकों के सम्मान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करना शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायक पहल है। ऐसे आयोजन समाज में शिक्षा और गुरु के सम्मान को नई पहचान देते हैं।

देशभर के 250 शिक्षकों का हुआ सम्मान

समारोह के दौरान विभिन्न राज्यों से चयनित 250 उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत किया गया। इन शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व, उत्कृष्ट शिक्षण कार्य और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और संस्कारों का विकास करना भी है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मान शिक्षकों को बेहतर कार्य करने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करते हैं।

स्व. हरिवंश मिश्र को दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान स्वर्गीय हरिवंश मिश्र को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने शिक्षा, अनुशासन और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया।

इन पदाधिकारियों की रही अहम भूमिका

समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूर्णानंद मिश्रा ने की। कार्यक्रम को सफल बनाने में संरक्षक मनोज वर्मा, दिजेंद्र कुर्रे, प्रेमचंद साव, रिंकल बग्गा, तरुण कुमार दास, पीतांबर मानिकपुरी, अजय कुमार जायसवाल, जितेंद्र मिश्रा, रूद्र नारायण तिवारी, वीरेंद्र कुमार कर, रीता पति, शैलेन्द्र नायक, मनोज मुच्छावड़, योगेश सिंह ठाकुर, गायत्री मिश्रा, एमएन वर्मा, आनंद शर्मा सहित राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।


संबंधित समाचार