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बिना कलेक्टर की मंजूरी संकुल समन्वयक की नियुक्ति? लोरमी बीईओ पर उठे सवाल,एक बार फिर सुर्खियों में नारद तेंदुलकर...

बिना कलेक्टर की मंजूरी संकुल समन्वयक की नियुक्ति? लोरमी बीईओ पर उठे सवाल,एक बार फिर सुर्खियों में नारद तेंदुलकर...

सैय्यद वाजिद/मुंगेली। लोरमी विकासखंड के शिक्षा विभाग में संकुल समन्वयक की नियुक्ति को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति के बिना ही एक सहायक शिक्षक को संकुल समन्वयक का प्रभार सौंप दिया। मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल

जानकारी के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला खैरवार खुर्द के सहायक शिक्षक (एलबी) नारद तेंदुलकर को संकुल हरदी का संकुल समन्वयक नियुक्त किए जाने का आदेश जारी किया गया। आरोप है कि यह नियुक्ति कलेक्टर की स्वीकृति के बिना की गई, जबकि प्रचलित प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन आवश्यक माना जाता है। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पहले भी विवादों में रहा मामला

नारद तेंदुलकर का नाम इससे पहले भी कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में चर्चा में रहा है। जनपद सदस्य सुरजीत भार्गव ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि संकुल समन्वयक के रूप में विधिवत नियुक्ति से पहले ही उनके नाम से करीब 80 हजार रुपये का भुगतान किया गया।

शिकायत में यह भी दावा किया गया कि भुगतान के समय संबंधित शिक्षक अधिकृत रूप से उस पद पर पदस्थ नहीं थे। ऐसे में भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

नियमों के पालन पर उठे प्रश्न

आरोप है कि शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार संकुल समन्वयक की नियुक्ति जिला स्तर पर कलेक्टर की स्वीकृति के बाद की जाती है। यदि बिना अनुमोदन के नियुक्ति आदेश जारी किया गया है तो इसकी विभागीय जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक विभाग की ओर से किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

जांच की उठी मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियुक्ति और भुगतान दोनों मामलों में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।

जिला शिक्षा अधिकारी का पक्ष

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस संबंध में जानकारी नहीं है। यदि शिकायत प्राप्त होती है या जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कथित भुगतान मामले की जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर नियुक्ति प्रक्रिया पर लगे आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर विभागीय जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है।


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