होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
अध्यात्म
मनोरंजन
सेहत
जॉब अलर्ट
जरा हटके
फैशन/लाइफ स्टाइल

 

जनजातीय सेवा को राष्ट्रीय पहचान, गोड़बोले दंपति को पद्मश्री मिलने पर CM साय ने दी बधाई...

जनजातीय सेवा को राष्ट्रीय पहचान, गोड़बोले दंपति को पद्मश्री मिलने पर CM साय ने दी बधाई...

रायपुर। राजधानी नई दिल्ली में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से जुड़े समाजसेवी दंपति डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। बस्तर के सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में वर्षों से निःस्वार्थ भाव से स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इस दंपति को मिले सम्मान पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल गोडबोले दंपति का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति Droupadi Murmu द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना जनसेवा और समर्पण के मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान है।

35 वर्षों से जनजातीय क्षेत्रों में दे रहे स्वास्थ्य सेवाएं

डॉ. रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले पिछले करीब 35 वर्षों से दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में रहकर जनजातीय समाज के बीच स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। वनवासी कल्याण आश्रम से जुड़े इस दंपति ने दूरस्थ वनांचलों में चिकित्सा सुविधाओं से वंचित लोगों के लिए नि:शुल्क उपचार, स्वास्थ्य जागरूकता और प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं को उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद गोडबोले दंपति ने जिस समर्पण और सेवा भावना के साथ कार्य किया, वह समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कुपोषण मुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और ग्रामीण क्षेत्रों में जनविश्वास कायम करने में उनके योगदान को अनुकरणीय बताया।

सेवा और समर्पण की मिसाल बना गोडबोले दंपति

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडबोले दंपति का जीवन समाज सेवा और मानवता की मिसाल है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज के उत्थान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समर्पित कर दिया। बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में रहकर लोगों की सेवा करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे अपना जीवन मिशन बनाया। मुख्यमंत्री ने दोनों समाजसेवियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को समाज सेवा, करुणा और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करेगी।



 

 

 

 


संबंधित समाचार