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महासमुंद में किसानों का फूटा गुस्सा, कावेरी सीड कंपनी पर 2.38 करोड़ रुपये बकाया रखने का आरोप, NH-353 पर चक्काजाम

महासमुंद में किसानों का फूटा गुस्सा, कावेरी सीड कंपनी पर 2.38 करोड़ रुपये बकाया रखने का आरोप, NH-353 पर चक्काजाम

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जमीन रेघा पर देने वाले किसानों का भुगतान नहीं होने से विवाद गहरा गया है। कावेरी सीड कंपनी पर 85 किसानों की करीब 2 करोड़ 38 लाख रुपये की राशि बकाया रखने का आरोप है। लंबे समय से भुगतान की मांग कर रहे किसानों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

किसानों का कहना है कि कंपनी ने उनकी जमीन रेघा पर लेते समय प्रति एकड़ 22 हजार से 25 हजार रुपये देने का वादा किया था। लेकिन फसल कटाई पूरी होने के बाद भी उन्हें निर्धारित राशि नहीं मिली। किसानों के मुताबिक, वे पिछले डेढ़ साल से भुगतान के लिए कंपनी से लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।

85 किसानों के 2.38 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा

प्रदर्शन कर रहे किसानों के अनुसार, कावेरी सीड कंपनी ने महासमुंद जिले के 85 किसानों से खेती के लिए जमीन रेघा पर ली थी। इसके बदले प्रति एकड़ 22,000 से 25,000 रुपये देने की बात कही गई थी। किसानों का आरोप है कि फसल कटने के बाद भी कंपनी ने भुगतान नहीं किया।

भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले आंदोलन कर रहे किसानों ने बताया कि कुल बकाया राशि लगभग 2 करोड़ 38 लाख रुपये है। उनका कहना है कि लंबे समय से भुगतान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें राहत नहीं मिली है। इसी नाराजगी के चलते किसानों ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बेलसोंडा के पास NH-353 पर लगाया जाम

अपनी मांगों को लेकर किसानों ने बेलसोंडा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-353 पर चक्काजाम किया। किसानों का कहना है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

चक्काजाम के कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई। सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों ने बकाया रकम का भुगतान सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

मौके पर पहुंचे तहसीलदार, कृषि विभाग और पुलिस के अधिकारी

किसानों के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। तहसीलदार, कृषि विभाग के अधिकारी और पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, किसान करीब दो घंटे से चक्काजाम कर रहे थे। अधिकारियों और किसानों के बीच बातचीत जारी रहने के बावजूद तत्काल समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा था। किसान बकाया भुगतान को लेकर स्पष्ट कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।

भुगतान नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी

किसानों का कहना है कि खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराने के बाद तय रकम नहीं मिलना उनके लिए आर्थिक परेशानी का कारण बन रहा है। डेढ़ साल से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे किसानों ने कंपनी से बकाया राशि दिलाने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फिलहाल, इस मामले में किसानों के आरोप और भुगतान संबंधी दावे सामने आए हैं। कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। प्रशासनिक बातचीत के बाद चक्काजाम समाप्त होने और भुगतान के समाधान को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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