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Kamal Nath: जनता पर टैक्स का बोझ क्यों? कमलनाथ का बड़ा हमला

Kamal Nath: जनता पर टैक्स का बोझ क्यों? कमलनाथ का बड़ा हमला

Kamal Nath: मध्य प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में पांच दिनों के भीतर लगातार हुई दूसरी वृद्धि ने सूबे के राजनैतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। इस मुद्दे को लेकर सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ ने केंद्र और राज्य की मोहन यादव सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

उन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर) पर एक तीखा बयान जारी करते हुए पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दामों को "सरकारी लूट" करार दिया है। कमलनाथ ने सीधे तौर पर आंकड़ों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार की दुहाई देकर आम नागरिकों की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है, जबकि तेल कंपनियां खुद रिकॉर्ड मुनाफा बटोर रही हैं।

नाथ ने वैट पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार के टैक्स ढांचे को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सूबे के नागरिक पहले से ही देश में सबसे महंगा ईंधन खरीदने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में आम जनता से प्रति लीटर पेट्रोल पर 30 रुपए से ज्यादा और डीजल पर 20 रुपए से अधिक का भारी-भरकम टैक्स वसूला जा रहा है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें काफी नीचे थीं, तब सरकार ने टैक्स घटाकर जनता को कोई राहत नहीं दी। अब जैसे ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम थोड़े से बढ़े, सरकार ने पूरा आर्थिक बोझ सीधे आम आदमी और मध्यम वर्ग के कंधों पर ट्रांसफर कर दिया।

कंपनियों के बंपर मुनाफे की खोली पोल

कमलनाथ ने अपने बयान में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के वित्तीय दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारी और निजी पेट्रोलियम कंपनियां खुद को घाटे में बताकर कीमतें बढ़ाने का तर्क देती हैं, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। पूर्व सीएम ने दावा किया कि इसी वित्तीय वर्ष में तेल कंपनियों ने लाखों करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया है। सिर्फ पिछली तिमाही के वित्तीय नतीजों को ही देखा जाए, तो इन कंपनियों के मुनाफे में 28 प्रतिशत से लेकर 78 प्रतिशत तक की भारी उछाल दर्ज की गई है। ऐसे में कंपनियों को घाटे में बताना सिर्फ मूल्य वृद्धि को जायज ठहराने का एक भ्रामक हथकंडा है।

नाथ की मांग, कम हो 10 रुपए दाम

इस आर्थिक बोझ से जनता को बचाने के लिए कमलनाथ ने मोहन यादव सरकार से मांग की है कि ईंधन पर लगने वाले राज्य सरकार के वैट (VAT) और उपकर (Cess) में तुरंत कटौती की जाए। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल-डीजल की दरों में कम से कम 10 रुपए प्रति लीटर की तत्काल कमी की जाए। गौरतलब है कि इस मूल्य वृद्धि के बाद परिवहन खर्च बढ़ने से रोजमर्रा की जरूरी चीजों (दूध, सब्जी, किराना) के भी महंगे होने की आशंका जताई जा रही है, जो आम जनता के बजट को पूरी तरह बिगाड़ देगी।


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