Iran Permits Indian Ships: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद न करते हुए भारत समेत पांच देशों के जहाजों को सीमित आवाजाही की अनुमति दे दी है। इससे होर्मुज में फंसे भारतीय तेल और गैस से लदे जहाजों के भारत लौटने का रास्ता साफ हो गया है।
20 भारतीय जहाजों को मिलेगी राहत
भारत सरकार के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में करीब 20 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं, जो इस अहम समुद्री मार्ग को पार करने के इंतजार में थे। अब ईरान के फैसले के बाद ये जहाज जल्द ही भारत पहुंच सकते हैं। इन जहाजों के आने से देश में तेल और गैस की सप्लाई को मजबूती मिलेगी और संभावित संकट काफी हद तक टल जाएगा।
किन देशों को मिली अनुमति?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा करते हुए कहा कि भारत के अलावा चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को भी होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने साफ किया कि ये सुविधा केवल “मित्र देशों” के लिए है और दुश्मन देशों या उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए यह मार्ग बंद रहेगा।
दुश्मन देशों के लिए बंद रहेगा रास्ता
ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान युद्ध जैसी स्थिति में दुश्मन देशों के जहाजों को अनुमति देना संभव नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है।
दुनिया के तेल सप्लाई पर असर
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया की लगभग 20% ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। इस मार्ग के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस संकट गहराने की आशंका बढ़ गई थी, लेकिन अब आंशिक रूप से खुलने से राहत की उम्मीद है।
भारत में क्या है स्थिति?
सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त सप्लाई बनी हुई है। हालांकि, फंसे हुए जहाजों के जल्द आने से भविष्य में भी सप्लाई स्थिर बनी रहेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा। ईरान के इस फैसले से भारत के लिए बड़ी राहत की स्थिति बनी है। होर्मुज स्ट्रेट के आंशिक खुलने से न केवल फंसे जहाजों को रास्ता मिलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की उम्मीद है।