iran israel war: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर इजरायल पर बड़ा हमला किया है। ताजा हमले में ईरानी मिसाइलें इजरायल के अत्यंत सुरक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डिमोना शहर तक पहुंच गईं, जहां देश का प्रमुख परमाणु रिएक्टर स्थित है। यह वही जगह है, जिसे दुनिया के सबसे सुरक्षित रक्षा कवच- आयरन डोम, एरो-3 और डेविड्स स्लिंग द्वारा कवर किया जाता है।
73वीं बार हमला, डिमोना तक मिसाइलें पहुंचीं:
ईरान ने दावा किया कि यह उसका 73वां रिटैलिएट्री स्ट्राइक था। इस बार मिसाइलें सीधे उस रेगिस्तानी इलाके तक पहुंचीं, जिसे इजरायल अब तक अभेद्य मानता था। हमले में सैकड़ों लोगों की मौत और दर्जनों घायल होने का दावा ईरानी मीडिया ने किया है, हालांकि इजरायल ने आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए हैं।
अमेरिकी सैन्य अड्डे भी आए निशाने पर:
हमले का दायरा सिर्फ इजरायल तक सीमित नहीं रहा। अमेरिकी सेना के कई ठिकानों पर भी मिसाइलें दागे जाने की बात सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने हमले की पुष्टि तो की, लेकिन किसी बड़े नुकसान से इंकार किया।
इजरायली मीडिया: "सबसे मुश्किल रात"
इजरायल के प्रमुख अखबारों ने इस हमले को “अब तक की सबसे कठिन और तनावपूर्ण रात” बताया। रिपोर्टों के अनुसार, देश के कई शहरों तेल अवीव, बेरशेबा, दिमोना में देर रात तक सायरन बजते रहे। लोगों को बंकरों में रहने की सलाह दी गई। ईरान का बड़ा बयान "जंग का समीकरण बदल चुका है"ईरान की ओर से जारी बयान में कहा गया। “अब वॉर बैलेंस तेजी से बदल रहा है। यह ऑपरेशन अंतिम नहीं, बल्कि नई रणनीति का संकेत है।” ईरान का यह संकेत साफ करता है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।
डिमोना क्यों है इतना महत्वपूर्ण:
इजरायल का मुख्य परमाणु रिएक्टर यहीं स्थित है देश की न्यूक्लियर कैपेबिलिटी से जुड़े अहम शोध यहीं होते हैं। इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित सैन्य साइट माना जाता है, इसी वजह से ईरान का दावा डिमोना तक पहुंच रणनीतिक रूप से बेहद बड़ी बात मानी जा रही है। ईरान-इजरायल विवाद अब सिर्फ सीमित टकराव नहीं, बल्कि क्षेत्रीय युद्ध की ओर बढ़ता दिख रहा है। दोनों देश इसे ‘जवाबी कार्रवाई’ बताते हुए अपनी सैन्य रणनीतियाँ बदल रहे हैं। डिमोना जैसे हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र पर हमला, युद्ध के समीकरण में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
‘दिमोना’ पर हुआ हमला:
जानकारी के मुताबिक इजरायल के रेगिस्तान में बसे दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर ‘दिमोना’ पर शनिवार की रात वह हमला हुआ जिसकी कल्पना तक मुश्किल मानी जाती थी। दिमोना, जहां इजरायल का गुप्त परमाणु रिएक्टर मौजूद है और जिसकी सुरक्षा के लिए आयरन डोम, डेविड स्लिंग और एरो जैसे दुनिया के सबसे महंगे और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम तैनात हैं- उसके ऊपर पहली बार ईरानी मिसाइल पहुंचने का दावा किया गया है। यह हमला ईरान के “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस” के 73वें चरण का हिस्सा था, जो अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में लगातार जारी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि यह अभियान अभी खत्म होने वाला नहीं है और हर नई लहर पहले से ज्यादा तीव्र व सटीक हो रही है।
शनिवार की रात क्या हुआ?
ईरान की IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने बयान जारी करते हुए बताया कि रात में इजरायल के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों पर एकसाथ बड़े पैमाने पर हमला किया गया। हमले में तीन अत्याधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ, फत्ताह हाइपरसोनिक मिसाइल इतनी तेज की रोकना बेहद मुश्किल। कद्र बैलिस्टिक मिसाइल लंबी दूरी से सटीक वार। एमाद मिसाइल भारी पेलोड और उच्च सटीकता के लिए प्रसिद्ध। इन मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में अटैक ड्रोन भी भेजे गए।
कहां-कहां निशाना साधा गया?
ईरान ने पाँच प्रमुख इजरायली शहरों पर सटीक हमले का दावा किया, जिसमें
दिमोना परमाणु रिएक्टर का शहर, बेर शेवा महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों वाला बड़ा शहर, ईलात लाल सागर किनारे स्थित रणनीतिक बंदरगाह, अराद सैन्य दृष्टि से अहम, किर्यात गत दक्षिणी इजरायल का महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक पॉइंट शामिल है, IRGC का दावा है कि दिमोना में मिसाइल गिरी और भारी जनहानि हुई, जबकि इजरायल इन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत बताया है।
अमेरिकी ठिकाने भी निशाने पर:
ईरान ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया कि इस लहर में केवल इजरायल नहीं बल्कि अमेरिका भी निशाने पर था। IRGC ने तीन बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागने का दावा किया अली अल-सलेम एयरबेस – कुवैत, अल-मिनहाद एयरबेस - यूएई, अल-धफरा एयरबेस- यूएई यह संकेत है कि ईरान अब सीधे अमेरिका को संघर्ष का हिस्सा मानकर चल रहा है।
नुकसान को लेकर दो विपरीत दावे:
सबसे अधिक विवाद दिमोना को लेकर है। ईरान का दावा: 200 से अधिक लोग मारे गए या घायल हुए। इजरायल का दावा: लगभग 50 लोग घायल हुए, कोई भारी नुकसान नहीं। लेकिन इजरायल के प्रमुख अखबार येदिओथ अहरोनोथ ने इसे “28 फरवरी के बाद नागरिकों के लिए सबसे कठिन रात” बताया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सिर्फ 50 घायलों के लिए इतनी बड़ी संख्या में एंबुलेंस और सैन्य हेलिकॉप्टर क्यों भेजे गए? इस पर इजरायली सरकार ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
उत्तर से हिजबुल्लाह का दबाव:
ईरान के हमलों के समानांतर, लेबनान का हिजबुल्लाह भी उत्तरी इजरायल पर लगातार रॉकेट और मिसाइलें दाग रहा है। IRGC ने बयान में कहा कि हिजबुल्लाह ने इजरायल के उत्तर और मध्य हिस्सों पर “भारी दबाव” बनाए रखा है। यानी इजरायल दो मोर्चों पर एकसाथ लड़ाई झेल रहा है।
IRGC का बड़ा दावा-“जंग के नियम बदल रहे हैं”
IRGC ने बयान में कहा कि “इजरायल की एयर डिफेंस अब पहले जैसी मजबूत नहीं रही। इतने हमले रोकना उसके बस की बात नहीं।” ईरान का मानना है कि इजरायल की रक्षा व्यवस्था लगातार हमलों के कारण कमजोर पड़ रही है और नई मिसाइल तकनीकों के सामने पारंपरिक इंटरसेप्टर सिस्टम कमज़ोर साबित हो रहे हैं। दिमोना तक मिसाइल पहुंचना सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के सुरक्षा समीकरण को बदलने वाला मोड़ माना जा रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है, जबकि इजरायल जानता है कि उसकी सबसे मजबूत सुरक्षा दीवार पर पहली बार गंभीर सवाल उठे हैं। यह टकराव जहां जा रहा है, वह आने वाले दिनों में पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हो सकता है।