केंद्र सरकार एक बार फिर डिलिमिटेशन (निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन) से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार सरकार इसे ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव के साथ जोड़कर संसद में पेश करने पर विचार कर रही है। इस अहम संवैधानिक पहल को सफल बनाने के लिए सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश कर रही है और क्षेत्रीय पार्टियों से संवाद का दौर भी शुरू हो चुका है।
दो-तिहाई बहुमत जुटाने पर फोकस
जानकारी के अनुसार, सरकार संसद में आवश्यक समर्थन सुनिश्चित करने के बाद ही इस विधेयक को आगे बढ़ाना चाहती है। ऐसे संवैधानिक संशोधनों के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार पहले से राजनीतिक समर्थन जुटाने में लगी है। माना जा रहा है कि पर्याप्त संख्या मिलने पर डिलिमिटेशन और एक साथ चुनाव कराने से जुड़े प्रस्ताव को संयुक्त रूप से पेश किया जा सकता है।
क्षेत्रीय दलों के रुख में दिख रहा बदलाव
सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर कुछ क्षेत्रीय दलों का रुख पहले की तुलना में नरम नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नेताओं ने परिसीमन पर चर्चा के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं, जबकि पहले कड़ा विरोध करने वाली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) भी संशोधित प्रस्ताव का इंतजार कर रही है। सरकार इन दलों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है ताकि व्यापक सहमति का माहौल तैयार किया जा सके।
महिला आरक्षण विधेयक से लिया सबक
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार ने हाल ही में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के अनुभव से सीख लेते हुए अपनी रणनीति में बदलाव किया है। उस समय अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में कठिनाई हुई थी। इसके बाद सरकार ने अन्य महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विधेयकों को तत्काल आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया था।
संसद में पेश करने से पहले बनेगी सहमति
सरकार का मानना है कि डिलिमिटेशन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे बड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाना जरूरी है। इसी वजह से संसद में विधेयक लाने से पहले व्यापक चर्चा और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस विषय पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।