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उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 265 एकड़ अतिक्रमण का खुलासा, 1 लाख पेड़ों की कटाई; 166 लोगों पर केस दर्ज...

उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में 265 एकड़ अतिक्रमण का खुलासा, 1 लाख पेड़ों की कटाई; 166 लोगों पर केस दर्ज...

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिला स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वन अतिक्रमण का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वन विभाग की जांच में करीब 265 एकड़ (106 हेक्टेयर) सघन जंगल पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। इस मामले में 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण (POR) दर्ज कर उन्हें बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं।

15 साल में बढ़ा अतिक्रमण का दायरा

जांच के अनुसार, धमतरी जिले के ग्राम जैतपुरी के कुछ लोगों ने पिछले 15 वर्षों में योजनाबद्ध तरीके से जंगल की कटाई कर भूमि पर कब्जा किया। वर्ष 2011 में जहां अतिक्रमण का क्षेत्र लगभग 45 हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 116 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

1 लाख पेड़ों की कटाई का अनुमान

वन विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की सैटेलाइट इमेजरी और हाई-रिजोल्यूशन ड्रोन सर्वे की मदद से क्षेत्र का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में सामने आया कि पहले जहां प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 पेड़ मौजूद थे, अब यह संख्या घटकर 25 से 50 पेड़ रह गई है। अनुमान है कि इस अतिक्रमण के चलते करीब 1 लाख पेड़ों की कटाई की गई।

आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सभी आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को अटैच किया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 साल तक की सजा मिली है। लोक संपत्ति क्षति अधिनियम के तहत 3 साल तक की सजा का प्रावधान हैं।

अतिक्रमण हटाकर होगा पुनर्वनीकरण

यह क्षेत्र महानदी के उद्गम से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील इलाका है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने के बाद यहां बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान, भूजल संरक्षण कार्य, पारिस्थितिक संतुलन बहाली की योजना बनाई गई है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई

टाइगर रिजर्व प्रबंधन पिछले तीन वर्षों में लगभग 850 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करा चुका है, जो इस दिशा में लगातार जारी सख्त कार्रवाई को दर्शाता है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में सामने आया यह मामला न केवल वन संरक्षण की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि तकनीक (सैटेलाइट और ड्रोन) के जरिए अब अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। आने वाले समय में इस तरह के मामलों में और सख्ती देखने को मिल सकती है।


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