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Harsha Richharia: हर्षा रिछारिया हर्षानंदगिरी का अनिलानंद महाराज को मुंहतोड़ जवाब 

Harsha Richharia: हर्षा रिछारिया हर्षानंदगिरी का अनिलानंद महाराज को मुंहतोड़ जवाब 

Harsha Richharia: राजधानी के संत समाज में संन्यास और अतीत को लेकर मचे घमासान में अब हर्षानंदगिरी पूर्व नाम हर्षा रिछारिया का बड़ा बयान सामने आया है। अनिलानंद महाराज द्वारा उठाए गए सवालों और की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्षानंदगिरी ने इसे ईर्ष्या और टीआरपी का खेल करार दिया है।

अग्निपरीक्षा दे रही हूं... 

हर्षानंदगिरी ने अपने ऊपर हो रहे हमलों को व्यक्तिगत अपमान बताते हुए कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से चुपचाप अपमान सह रही थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि व्यक्ति में परिवर्तन कभी भी आ सकता है। क्या जितने भी संत हैं, वे सब गर्भ से ही साधु-संत बनकर निकले हैं? समाज में ऐसे कई संत हैं जिनका लंबा क्रिमिनल रिकॉर्ड है, लेकिन मेरा ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है।

संन्यास पर विरोध

हर्षानंदगिरी ने समाज और कुछ संतों के दोहरे मापदंडों पर हमला बोलते हुए कहा कि जब कोई लड़की धर्म परिवर्तन कर शादी करती है, तब भी विरोध होता है और जब मैंने संन्यास लिया, तब भी विरोध हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसी एक का तो समर्थन कर देते। राम जी ने मेरी किस्मत में संन्यास लिखा है, तो उसे अब कोई नहीं रोक सकता।

नचनिया शब्द पर भड़कीं हर्षा

अनिलानंद महाराज द्वारा कथित तौर पर नचनिया जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर हर्षानंदगिरी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुंभ के पहले से ही मेरी विदेशों तक पहचान थी, लोग मुझे जानते थे। आप केवल TRP के लिए मुझे नचनिया कह रहे हैं। आपने मुझे कहां नाचते हुए देख लिया? यह केवल ईर्ष्या वश किया जा रहा है। आपकी ऐसी हरकतों की वजह से ही युवा भटक रहे हैं और लव जिहाद का शिकार हो रहे हैं। मुझे अब किसी के आदेश या उपदेश की जरूरत नहीं है।

विवाद की जड़ संन्यास और पूर्व जीवन

बता दें कि हर्षानंदगिरी के संन्यास लेने और उनके पूर्व के व्यावसायिक जीवन को लेकर कुछ संतों ने आपत्ति जताई थी, जिसके बाद से ही सोशल मीडिया और बयानों के जरिए यह जंग जारी है। हर्षानंदगिरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने मार्ग पर अडिग हैं।


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