Chhattisgarh Electricity Rate Hike: रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ती महंगाई के बीच आम उपभोक्ताओं को जल्द ही एक और आर्थिक झटका लग सकता है। राज्य में बिजली दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नए बिजली टैरिफ को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जून महीने में इस पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग और खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे समय में यदि बिजली दरों में वृद्धि होती है तो इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और उद्योगों पर पड़ेगा। बिजली बिल में संभावित बढ़ोतरी को लेकर लोगों की नजरें अब छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हुई हैं।
6308 करोड़ रुपये के घाटे का दावा
राज्य बिजली वितरण कंपनी (CSPDCL) ने नियामक आयोग के समक्ष वर्ष 2026-27 के लिए करीब 6308.24 करोड़ रुपये के अनुमानित राजस्व घाटे की जानकारी दी है। कंपनी का कहना है कि वित्तीय संतुलन बनाए रखने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी उपभोक्ता वर्गों में टैरिफ संशोधन आवश्यक है। प्रस्ताव के अनुसार घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक श्रेणियों में बिजली दरों में समान रूप से वृद्धि की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय नियामक आयोग द्वारा लिया जाएगा।
बिजली खरीद पर सबसे अधिक खर्च
कंपनी द्वारा प्रस्तुत याचिका के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 25,460.30 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता होगी। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा बिजली खरीद पर खर्च होने वाला है, जो लगभग 21,150.81 करोड़ रुपये बताया गया है। इसके अलावा संचारण एवं रखरखाव कार्यों पर 3,250.34 करोड़ रुपये, ब्याज भुगतान पर 429.50 करोड़ रुपये और अन्य मदों में 1,116.15 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
आने वाले वर्षों में बढ़ सकता है वित्तीय बोझ
पावर कंपनी के अनुमान के अनुसार आगामी वर्षों में बिजली क्षेत्र का खर्च लगातार बढ़ने वाला है। वर्ष 2027-28 में कुल खर्च 27,306.02 करोड़ रुपये, जबकि 2028-29 में यह बढ़कर 30,307.93 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे भविष्य में भी बिजली दरों पर दबाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
जनसुनवाई पूरी, अंतिम निर्णय का इंतजार
नए टैरिफ प्रस्ताव को लेकर फरवरी 2026 में जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसके बाद आयोग ने कुछ अतिरिक्त दस्तावेज और स्पष्टीकरण भी मांगे थे। वर्तमान में आयोग प्रस्ताव की विस्तृत समीक्षा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार सरकार और नियामक आयोग के बीच अंतिम स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो बिजली उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है।
उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
पेट्रोल-डीजल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद बिजली दरों में संभावित वृद्धि ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों और छोटे व्यवसायों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक असर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें जून में आने वाले नियामक आयोग के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों की वित्तीय जरूरतों और उपभोक्ताओं के हितों के बीच किस प्रकार संतुलन बनाया जाएगा।