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Rameshwar Sharma: दिग्विजय की आंखों में हमेशा हिंदू ही खटकता है: रामेश्वर शर्मा

Rameshwar Sharma: दिग्विजय की आंखों में हमेशा हिंदू ही खटकता है: रामेश्वर शर्मा

Rameshwar Sharma: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बयानों के तीर एक बार फिर मर्यादा की सीमा पार कर चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए एक विवादित बयान पर मध्य प्रदेश भाजपा के सबसे मुखर चेहरों में से एक और हुजूर विधानसभा से विधायक रामेश्वर शर्मा ने बेहद कड़ा और आक्रामक पलटवार किया है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस को इतिहास का आईना दिखाते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर दिग्विजय सिंह तक की पूरी विचारधारा को सीधे तौर पर 'हिंदू विरोधी' करार दे दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा से ही बहुसंख्यक समाज को सांप्रदायिक चश्मे से देखती आई है, जिसके चलते आज देश में उसकी यह दुर्दशा हुई है।

क्या जिन्ना हिंदू था? 

बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति पर हमला बोलते हुए भारत के इतिहास के पन्ने खोले। उन्होंने मीडिया के सामने कड़े लहजे में कहा कि दिग्विजय सिंह और उनकी पार्टी हिंदुओं को हमेशा एक दुश्मन और सांप्रदायिक के रूप में प्रस्तुत करती है। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि क्या साल 1947 में देश का बंटवारा हिंदुओं ने करवाया था? क्या पाकिस्तान की मांग करने वाला मोहम्मद अली जिन्ना हिंदू था? देश का विभाजन कराने वाले कट्टरपंथियों के साथ तब भी कांग्रेस खड़ी थी और आज भी वही कर रही है।

अलगाववाद पैदा कर रही है कांग्रेस

रामेश्वर शर्मा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि कांग्रेस 'अल्पसंख्यक' का कार्ड खेलकर देश के मुसलमानों को मुख्यधारा से जोड़ने की बजाय उन्हें समाज से अलग-थलग कर रही है। कांग्रेस वोट बैंक के लालच में आज भी देश के भीतर अलगाववाद की भावना पैदा कर रही है और कट्टरता को हवा दे रही है। आज भी कांग्रेस का एक धड़ा आतंकवादियों, अलगाववादियों और देश विरोधी ताकतों के पक्ष में खड़ा नजर आता है। यही वजह है कि देश की जनता ने कांग्रेस को पूरी तरह नकार दिया है और वह विनाश की ओर बढ़ रही है।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने सीधे दिग्विजय सिंह को निशाने पर लेते हुए कई भावुक और तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह जी, जरा अपने आकाओं और चहेतों से पूछिए कि इस देश की माताओं-बहनों की मांग का सिंदूर किसने उजाड़ा? इस पावन भूमि के सदियों पुराने मठ और मंदिर किसने तोड़े? इतिहास गवाह है कि हिंदू कभी भी सांप्रदायिक नहीं रहा। हिंदू समाज ही पूरी दुनिया के मानचित्र, मानवता और वसुधैव कुटुंबकम का सम्मान करने वाला है। लेकिन आज जब देश का हिंदू जाग चुका है, उसने करवट ले ली है और वह अपनी मातृभूमि व संस्कृति की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा है, तो आपको उसमें सांप्रदायिकता नजर आने लगी है।


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