छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर सदन में सत्ता पक्ष ने अपनी बात मजबूती से रखी, जबकि विपक्ष ने इसके उद्देश्य और मंशा पर सवाल उठाए।
सत्ता पक्ष ने रखा कड़ा रुख
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने की। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर समाज को बांटने का काम पहले भी हुआ है और अब ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून जरूरी है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और कठोर नीति अपनाने की आवश्यकता है, ताकि सामाजिक संतुलन बना रहे।
‘मतांतरण’ को बताया बड़ी चुनौती
भाजपा नेता धरमलाल कौशिक ने चर्चा के दौरान कहा कि केवल धर्मांतरण ही नहीं, बल्कि “मतांतरण” भी एक गंभीर समस्या बन चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर उनके विचार बदले जा रहे हैं और खासकर कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए, जिससे इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
टीएस सिंहदेव ने उठाए विधेयक पर सवाल
वहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस विधेयक को लेकर अपनी शंकाएं जाहिर कीं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस कानून की आवश्यकता और उद्देश्य स्पष्ट नहीं लगते।
सिंहदेव ने कहा कि देश में कोई धर्म खतरे में नहीं है और इस तरह के विधेयक केवल राजनीतिक माहौल बनाने के लिए लाए जाते हैं।
विचारधारा पर भी छिड़ी बहस
अजय चंद्राकर के कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस की सोच हमेशा सहिष्णुता और सभी धर्मों के सम्मान पर आधारित रही है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि हर धर्म को स्वीकार और सम्मान देना ही भारतीय संस्कृति की पहचान है।