रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन में राजनीतिक माहौल पूरे दिन गरमाया रहा। प्रश्नकाल में सरकारी आयोजनों पर हुए खर्च और औद्योगिक दुर्घटनाओं को लेकर सरकार से सवाल पूछे गए, जबकि शून्यकाल में किसानों को खाद और बीज उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा विपक्ष ने प्रमुखता से उठाया। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी की और बाद में बहिर्गमन कर दिया।
बिलासपुर में सरकारी खर्च को लेकर उठे सवाल
कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने बिलासपुर जिले में दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच आयोजित शासकीय कार्यक्रमों पर हुए व्यय का पूरा विवरण मांगा। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि खर्च में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो क्या सरकार जांच कराएगी।
लोक निर्माण मंत्री अरुण साव ने जवाब देते हुए कहा कि सभी भुगतान निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है। यदि कोई शिकायत या प्रमाण उपलब्ध कराया जाता है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
औद्योगिक हादसों पर सरकार से तीखे सवाल
चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने औद्योगिक दुर्घटनाओं में जवाबदेही तय करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि जिन मामलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी है, उनमें संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
सरकार की ओर से कहा गया कि जांच में जिसके खिलाफ तथ्य सामने आएंगे, उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इस जवाब पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
खाद-बीज की उपलब्धता पर विपक्ष का आक्रामक रुख
शून्यकाल में विपक्ष ने किसानों को खाद और बीज उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का कहना था कि कई जिलों में किसान खाद के लिए परेशान हैं और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार से मांग की कि किसानों की समस्या पर सदन में विस्तृत चर्चा कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया प्रदर्शन
खाद-बीज के मुद्दे पर मंत्री रामविचार नेताम ने सरकार का पक्ष रखा, लेकिन विपक्ष ने उनके जवाब को अपर्याप्त बताया। इसके बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के वेल तक पहुंच गए।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नियमों के तहत वेल में पहुंचने पर विपक्षी सदस्य स्वतः निलंबित हो गए। इसके बाद सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
तीसरे दिन राजनीतिक टकराव रहा केंद्र में
मानसून सत्र के तीसरे दिन किसानों के मुद्दे, सरकारी खर्च और औद्योगिक सुरक्षा जैसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई और पारदर्शिता का दावा दोहराया।