रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बिलाईगढ़ विधानसभा क्षेत्र के किसानों की सिंचाई समस्या प्रमुखता से उठाई गई। क्षेत्र की विधायक कविता प्राण लहरे ने प्रश्नकाल के दौरान सरकार का ध्यान किसानों की सबसे बड़ी जरूरत—पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था—की ओर आकर्षित करते हुए दोहरी फसल के लिए नई सिंचाई परियोजनाएं शुरू करने की मांग की।
दोहरी फसल के लिए पर्याप्त पानी नहीं
विधायक कविता प्राण लहरे ने कहा कि महानदी और जोंक नदी जैसे जल स्रोत क्षेत्र में मौजूद होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान सिंचाई सुविधाओं के अभाव में रबी और खरीफ दोनों सीजन की खेती नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने सरकार से क्षेत्र की सिंचित एवं असिंचित भूमि, वर्तमान योजनाओं और प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी भी मांगी।
सरकार ने माना, सिंचाई की कमी बड़ी चुनौती
सरकार ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि बिलाईगढ़ क्षेत्र के अधिकांश किसान पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं मिलने के कारण दोहरी फसल लेने में असमर्थ हैं। सदन में दी गई जानकारी के अनुसार क्षेत्र में 47,848 हेक्टेयर भूमि सिंचित है, जबकि 17,278 हेक्टेयर भूमि अब भी असिंचित है। वहीं दोहरी फसल के लिए केवल 1,684 हेक्टेयर भूमि को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।
नई सिंचाई योजनाओं पर चल रहा काम
सरकार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में महानदी पर दो नई सिंचाई योजनाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा जोंक नदी से संबंधित परियोजनाओं पर भी प्रक्रिया जारी है। तकनीकी परीक्षण और डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार होने के बाद क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
विधायक कविता प्राण लहरे ने कहा कि बिलाईगढ़ एक कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए सिंचाई व्यवस्था का विस्तार जरूरी है। उन्होंने सरकार से महानदी और जोंक नदी के जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए नई परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने तथा किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त सिंचाई व्यवस्था विकसित होती है तो किसान दोहरी फसल लेकर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकेंगे।