छत्तीसगढ़ में स्टील उद्योगों को लंबे समय से मिल रही सस्ती बिजली पर जल्द ही असर पड़ सकता है। राज्य पॉवर कंपनी ने 2026-27 के नए बिजली टैरिफ के लिए नियामक आयोग में याचिका दायर कर लोड फैक्टर छूट को 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने की मांग की है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो स्टील उद्योगों को मिलने वाली बिजली दरों में राहत कम हो जाएगी और उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
लोड फैक्टर छूट से मिल रही थी बड़ी राहत
प्रदेश में पिछली सरकार के दौरान स्टील उद्योगों को बिजली दरों में बड़ी राहत दी गई थी। लोड फैक्टर व्यवस्था के तहत उद्योग जितनी अधिक बिजली खपत करते हैं, उन्हें उतनी ज्यादा टैरिफ छूट मिलती है। इसी नीति के कारण कई स्टील प्लांट घरेलू उपभोक्ताओं से भी कम दर पर बिजली प्राप्त कर रहे थे।
क्या है लोड फैक्टर सिस्टम?
लोड फैक्टर बिजली उपयोग की वह प्रणाली है जिसमें उद्योग द्वारा लिए गए कनेक्शन की क्षमता और वास्तविक खपत के आधार पर टैरिफ में छूट दी जाती है। पहले 63 से 70 फीसदी तक बिजली उपयोग पर 1 से 8 फीसदी तक छूट मिलती थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 से 75 फीसदी उपयोग पर 25 फीसदी तक छूट का प्रावधान कर दिया गया।
अब फिर कम हो सकती है छूट
भाजपा सरकार बनने के बाद 2024-25 के टैरिफ में इस छूट को घटाकर 10 फीसदी किया गया था। हालांकि बाद में 2025-26 सत्र में इसे फिर से 25 फीसदी कर दिया गया। अब पॉवर कंपनी ने नए टैरिफ प्रस्ताव में इसे दोबारा कम करने की मांग की है, जिस पर आयोग स्तर पर विचार जारी है।
घरेलू उपभोक्ताओं से सस्ती पड़ रही बिजली
विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े स्टील उद्योग आसानी से 70 से 75 फीसदी तक लोड उपयोग कर लेते हैं। ऐसे में 6.40 रुपए प्रति यूनिट का टैरिफ 25 फीसदी छूट के बाद करीब 5 रुपए प्रति यूनिट तक पहुंच जाता है। हालांकि उद्योग संचालकों का कहना है कि अन्य शुल्क और एफपीपीएएस जोड़ने के बाद उन्हें बिजली करीब 7 रुपए यूनिट पड़ती है। इसके बावजूद यह दर कई घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में कम मानी जा रही है।
उद्योग जगत की दलील
स्टील उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि बिजली उत्पादन लागत का बड़ा हिस्सा होती है और यदि छूट कम की जाती है तो उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी। वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनियों का मानना है कि अत्यधिक छूट से राजस्व पर दबाव बढ़ रहा है।