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छत्तीसगढ़ में बिजली टैरिफ बढ़ने की आशंका, पावर कंपनी ने 6300 करोड़ घाटे की भरपाई मांगी

छत्तीसगढ़ में बिजली टैरिफ बढ़ने की आशंका, पावर कंपनी ने 6300 करोड़ घाटे की भरपाई मांगी

छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लग सकता है। राज्य की पावर कंपनी ने करीब 6300 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई के लिए बिजली नियामक आयोग के सामने याचिका दायर की है। इस याचिका में नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। फिलहाल इस मामले में बिजली नियामक आयोग स्तर पर मंथन चल रहा है और जनसुनवाई के बाद अब कंपनी के आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्यों पर दबाव

बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की एक पावर कंपनी से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि बिजली कंपनियों को होने वाले घाटे की भरपाई समय पर और पूरी तरह की जानी चाहिए। इसके बाद राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल ने भी सभी राज्यों को इसी दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इसी के चलते छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी ने अपने वित्तीय अंतर और घाटे का विस्तृत विवरण तैयार कर नियामक आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है।

सरकार की सब्सिडी से कम हो सकता है बोझ

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आयोग पावर कंपनी के घाटे को लगभग 5000 करोड़ रुपये भी स्वीकार कर लेता है, तो बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। हालांकि यदि राज्य सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराती है, तो टैरिफ वृद्धि को सीमित किया जा सकता है। अन्यथा बिजली कंपनियों को घाटे की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी करनी ही पड़ेगी।

2026-27 के लिए पावर कंपनी ने पेश किया वित्तीय ब्यौरा

पावर कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली नियामक आयोग में जो याचिका दाखिल की है, उसमें आय और व्यय का विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया गया है।

कंपनी के अनुसार वर्तमान दरों पर उसे लगभग 26,216 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है, जबकि सालभर का कुल खर्च 25,460 करोड़ रुपये आंका गया है। इस हिसाब से कंपनी को लगभग 756 करोड़ रुपये का लाभ दिखाई देता है। लेकिन पिछले वर्षों के वित्तीय अंतर को जोड़ने पर स्थिति बदल जाती है। पुराने घाटे को समायोजित करने के बाद भी कंपनी को करीब 6300 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व की आवश्यकता बताई गई है।

आयोग तय करेगा वास्तविक घाटा

बिजली नियामक आयोग अब कंपनी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और दस्तावेजों का परीक्षण कर रहा है। जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग यह तय करेगा कि कंपनी का वास्तविक घाटा कितना स्वीकार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयोग 6300 करोड़ रुपये के बजाय करीब 5000 करोड़ रुपये का घाटा भी मानता है, तो बिजली टैरिफ में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का घाटा स्वीकार किए जाने पर बिजली दरों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी।

घाटे को किस्तों में समायोजित करने का विकल्प

नियामक आयोग के सामने एक विकल्प यह भी है कि पूरे घाटे को एक साथ उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय तीन वर्षों में किस्तों के रूप में समायोजित किया जाए। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ऐसा करने से केंद्र सरकार की आरडीएसएस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता पर असर पड़ सकता है। इसलिए इस विकल्प पर सावधानीपूर्वक विचार किया जा रहा है।

पहले भी मिल चुकी है राहत

दो वर्ष पहले राज्य सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए करीब 1000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी। इससे बिजली दरों में संभावित वृद्धि का बोझ कम हुआ था।

 

 


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