रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने ऑनलाइन IPL सट्टा सिंडिकेट के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान 1 करोड़ 2 लाख 81 हजार 300 रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन, मोबाइल फोन समेत कुल 1 करोड़ 3 लाख 86 हजार 300 रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क केवल रायगढ़ तक सीमित नहीं था, बल्कि रायपुर, बिलासपुर, सक्ती और दिल्ली तक फैला हुआ था। आरोपियों पर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी के जरिए बड़ी रकम जुटाकर हवाला चैनलों से ब्लैक मनी को व्हाइट करने का आरोप है।
पूछताछ में खुला बड़े नेटवर्क का राज
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई में मोबाइल फोन, डिजिटल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपियों ने रायगढ़ के कथित खाईवाल करण चौधरी और जसमीत सिंह बग्गा उर्फ गुड्डा सरदार के इशारे पर पूरे नेटवर्क के संचालन की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने टेक्निकल इनपुट, कॉल डिटेल, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रेल के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। जांच में पता चला कि आरोपी लंबे समय से ऑनलाइन IPL सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क चला रहे थे।
सट्टे की रकम को हवाला से किया जाता था ट्रांसफर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टे से मिलने वाली रकम को सीधे अपने खातों में रखने के बजाय आरोपी परिचित कारोबारियों, पेट्रोल पंप, मेडिकल स्टोर और अन्य व्यवसायिक माध्यमों के जरिए कैश डंप करते थे। इसके बाद हवाला चैनल के जरिए रकम को दूसरी जगह ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि कृष्ण प्राइड टावर में रहने वाले पुष्कर अग्रवाल और उसके पिता सुनील अग्रवाल इस पूरे नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहे थे। दोनों पर सट्टे से मिली ब्लैक मनी को हवाला के जरिए वैध बनाने का आरोप है।
फ्लैट में रेड के दौरान मिले नोटों के बंडल
करण चौधरी से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने कृष्ण प्राइड टावर स्थित फ्लैट में छापेमारी की। यहां से सुनील अग्रवाल के कब्जे से 50 लाख रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए। वहीं पुष्कर अग्रवाल के पास से 52 लाख 60 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। इससे पहले पुलिस ने करण चौधरी के कब्जे से भी नकदी और मोबाइल फोन बरामद किए थे।
दूसरों के अकाउंट और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करने से बचते थे। पुलिस के अनुसार, लेनदेन के लिए कर्मचारियों, परिचितों और सहयोगियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का उपयोग किया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके। इलेक्ट्रॉनिक डेटा, यूपीआई ट्रांजेक्शन और चैट रिकॉर्ड के विश्लेषण से यह साफ हुआ कि यह सिर्फ सट्टेबाजी का मामला नहीं, बल्कि संगठित आर्थिक अपराध सिंडिकेट था।
एसएसपी ने दी सख्त चेतावनी
रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि जिले में सट्टा, हवाला, ब्लैक मनी और संगठित अपराध से जुड़े किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगी।