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Bhopal Crime Branch: भोपाल क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन, 2 अवैध हथियार फैक्ट्रियां का भंडाफोड़

Bhopal Crime Branch: भोपाल क्राइम ब्रांच का बड़ा एक्शन, 2 अवैध हथियार फैक्ट्रियां का भंडाफोड़

Bhopal Crime Branch: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की क्राइम ब्रांच पुलिस को अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। भोपाल पुलिस ने टीकमगढ़ जिले में समानांतर रूप से संचालित हो रही दो हाई-टेक अवैध हथियार निर्माण इकाइयों का भंडाफोड़ किया है।

इस ऑपरेशन में पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में बने और अधबने घातक हथियार, कारतूस, जिंदा मैगजीन समेत गन-मेकिंग में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनरी और कच्चा माल जब्त किया है। पुलिस की तफ्तीश में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह यह है कि एक ही परिवार पिछले 35 से 40 वर्षों से, यानी तीन पीढ़ियों से इस खूनी और अवैध कारोबार को खानदानी धंधे की तरह चला रहा था।

भोपाल में पकड़े गए तस्कर 

जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले भोपाल क्राइम ब्रांच की टीम ने राजधानी से मुख्तार खान नाम के एक शातिर हथियार तस्कर को दबोचा था। पुलिस रिमांड के दौरान जब मुख्तार से कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में छिपे इस अवैध हथियारों के सबसे बड़े स्त्रोत का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट का नेटवर्क मध्य प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था। आगामी चुनावों और स्थानीय गैंग्स को इन फैक्ट्रियों से सीधे तौर पर कस्टमाइज्ड हथियार सप्लाई किए जा रहे थे।

क्राइम ब्रांच ने जब टीकमगढ़ में तय ठिकानों पर एक साथ छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं। मास्टरमाइंड सुरेंद्र विश्वकर्मा ने पुलिस को छकाने के लिए दो अलग-अलग जगहों पर फैक्ट्रियां सेटअप कर रखी थीं। पहली यूनिट ग्राम चंदेरी स्थित उसके खुद के मकान में चल रही थी। वहीं दूसरी बड़ी यूनिट को उसने ग्राम रामगढ़ में स्थित एक बड़े व्यावसायिक वेयरहाउस के भीतर छिपा रखा था। सुरेंद्र ने वेयरहाउस के मालिक को भी इस अवैध कमाई का चस्का लगा रखा था। उसने गोदाम मालिक को अपना गुप्त पार्टनर बनाया था और उसे हर महीने 20,000 का फिक्स किराया और मुनाफे में हिस्सेदारी दी जा रही थी।

खुद बनाते थे गन के कलपुर्जे

पकड़े गए मुख्य आरोपी सुरेंद्र विश्वकर्मा का क्रिमिनल रिकॉर्ड बेहद डरावना है और वह गन-मेकिंग का उस्ताद माना जाता है। मामले का आधिकारिक खुलासा करते हुए क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि, सुरेंद्र विश्वकर्मा पर पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह पूर्व में भी जेल जा चुका है और अभी हाल ही में जनवरी 2025 में सलाखों से बाहर आने के बाद उसने दोबारा अपनी तीसरी पीढ़ी को इस धंधे में धकेल कर काम शुरू कर दिया था।

इस गैंग की खासियत यह थी कि ये हथियारों के सभी छोटे-बड़े कलपुर्जे खुद ही मशीनों से तैयार करते थे। बाहर से कुछ न खरीदने के कारण इनकी लागत बेहद कम आती थी और ये बाजार में अंधाधुंध मुनाफा कमा रहे थे। मौके से एक तैयार देसी पिस्टल, 3 अधबनी पिस्तौलें, कई जिंदा कारतूस और क्रेन-लेथ मशीनें जब्त की गई हैं। नेटवर्क से जुड़े अन्य तस्करों की तलाश जारी है।


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