MPPSC 2023-2024: मध्यप्रदेश शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 34 नए डिप्टी कलेक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। यह नियुक्तियां राज्य सेवा परीक्षा 2023-24 के अंतिम परिणामों के आधार पर की गई हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मुख्य सूची से चयनित अभ्यर्थियों को उप जिलाध्यक्ष (डिप्टी कलेक्टर) के पद पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया गया है।
नियुक्त डिप्टी कलेक्टरों की सूची
अजीत कुमार मिश्रा – पन्ना
भुवनेश चौहान – भोपाल
यशपाल स्वर्णकार – सागर
अभिषेक जैन – दमोह
अनुराग गुर्जर – इंदौर
प्रिया अग्रवाल – सतना
अर्पिता राय – इंदौर
सूरज सिंह – मुरैना
कल्पेश सिंघई – सागर
अदिति जैन – छतरपुर
अंकित उक्के – सिंगरौली
मोना दांगी – इंदौर
आरुषि गुप्ता – इंदौर
नरेंद्र सिंह मेवाड़ा – सीहोर
अक्षांश श्रीवास्तव – दतिया
पंकज परमार – देवास
सिद्धार्थ मेहता – रतलाम
रानी अहिरवार – विदिशा
रश्मि कुशरे – डिंडौरी
सीमा बडोले – इंदौर
कृष्णपाल सिंह बघेल – इंदौर
शीतल ठाकुर – बालाघाट
सोनाली डावर – बड़वानी
अभ्यर्थियों के लिए रहेंगी ये शर्तें
राज्य शासन द्वारा चयनित अधिकारियों को प्रारंभिक तौर पर दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में रखा जाएगा। इस अवधि के दौरान उनके कार्य, आचरण और क्षमता का मूल्यांकन किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार अधिकारियों को पे-मैट्रिक्स लेवल-12 के अंतर्गत 15,600 से 39,100 रुपये वेतन के साथ 5,400 रुपये ग्रेड पे प्रदान किया जाएगा। शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां अस्थायी एवं सीमित अवधि के लिए की गई हैं। यदि किसी अभ्यर्थी का कार्य संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो उसकी नियुक्ति निरस्त की जा सकती है।
कार्यभार ग्रहण और प्रशिक्षण
सभी नवनियुक्त डिप्टी कलेक्टरों को 06 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से पदभार संभालना होगा। इसके बाद 09 फरवरी 2026 से 123वां संयुक्त आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया जाएगा। यह प्रशिक्षण भोपाल स्थित आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित होगा। प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए अधिकारियों को 08 फरवरी की शाम तक अकादमी में उपस्थित होना आवश्यक रहेगा।
बॉण्ड, पेंशन और अन्य जरूरी प्रावधान
कार्यभार ग्रहण करने से पहले सभी अधिकारियों को शासन के पक्ष में निर्धारित बॉण्ड भरना अनिवार्य होगा। यदि कोई अधिकारी परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं कर पाता है, तो उसे प्रशिक्षण एवं वेतन पर हुए खर्च की राशि शासन को लौटानी होगी। इसके अलावा, 01 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त होने के कारण इन अधिकारियों पर नई अंशदान आधारित पेंशन योजना लागू होगी। जो अभ्यर्थी पहले से किसी सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उन्हें नियुक्ति से पहले एनओसी प्रस्तुत करना या विधिवत इस्तीफा देना अनिवार्य होगा।