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MP Metropolitan City : भोपाल से जुड़ेंगे 4 जिले, मिलाकर बनेगी मेट्रोपोलिटन सिटी, मिली मंजूरी

MP Metropolitan City : भोपाल से जुड़ेंगे 4 जिले, मिलाकर बनेगी मेट्रोपोलिटन सिटी, मिली मंजूरी

MP Metropolitan City : भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर और राजगढ़ जिले को मिलाकर एक मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जाएगा। जिसके लिए राज्य विधानसभा में महानगर योजना एवं विकास अधिनियम 2025 को मंजूरी मिल गई है। विधानसभा में मंगलवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधेयक पेश किया, जिसे ध्वनि मत से पास किया गया।

बनेगी मेट्रोपोलिटन सिटी

इस विधेयक की मंजूरी से पांच जिलों को मिलाकर मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जाएगा, जिससे भोपाल के आसपास के जिलों में उद्योगों की स्थापना का रास्ता साफ होगा। फिलहाल भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाया जा रहा है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि जबलपुर, ग्वालियर और रीवा के लिए भी जल्दी ही बिल लाएंगे। भोपाल को इन जिलों से जोड़ने पर यह देश के पांच महानगरों में शुमार होगा, जो क्षेत्रफल के मामले में हैदराबाद और पुणे से आगे निकल जाएगा।

एक्ट से पहले किया अध्ययन 

मेट्रोपॉलिटन सिटी एक्ट पर जवाब देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि इस एक्ट को बनाने के पहले देश भर के सभी मेट्रोपॉलिटन सिटी का अध्ययन किया गया है। इसके बाद यह तय किया गया कि इसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो नामांकित सदस्यों के अलावा भी एक्सपर्ट‍्स को बुलाया जा सकता है। 

निकायों के अधिकारों में नहीं आएगी कमी

सिंघार ने कहा कि विकास के बहाने जमीन छीनने की कोशिश की जा रही है। सरकार क्या किसानों की एक-दो करोड़ की जमीन की कीमत बाजार मूल्य के हिसाब से देगी। सरकार इसे भी स्पष्ट करें। इस एक्ट के बाद स्थानीय निकायों के अधिकारों को लेकर क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इंदौर का मास्टर प्लान जून तक लाने का वादा नगरीय विकास मंत्री ने सदन में किया था, लेकिन अब तक नहीं आया। इसका जवाब देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि स्थानीय निकायों के अधिकारों में कमी नहीं आएगी। 

सिंघार बोले, दिखा रहे सपना

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जनता को मेट्रोपॉलिटन सिटी के नाम पर सपना दिखाया जा रहा है। जो एरिया इन शहरों के लिए तय किए जा रहे हैं, क्या उनके क्षेत्र में रहने वाले गरीबों के लिए सरकार ने कोई व्यवस्था अब तक की है। सरकार के पास आधारभूत सुविधाएं नहीं है। पीथमपुर के कई इलाकों में पीने के लिए पानी नहीं मिल पाता है। 


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