मुकेश प्रजापति, सीहोर: जिले में इन दिनों सूर्यदेव के तीखे तेवरों के कारण गर्मी अपने प्रचंड रूप में है। मौसम के इस बदलते मिजाज और बढ़ते पारे को पर्यावरण असंतुलन का एक बड़ा संकेत मानते हुए वन विभाग ने सीधे मैदानी मोर्चे पर कमान संभाल ली है। वन मंडलाधिकारी सीहोर, अर्चना पटेल के मार्गदर्शन में वन क्षेत्रों और ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद प्रभावी और अनोखी मुहिम चलाई जा रही है। इस अभियान के तहत सुदूर वनांचल में रहने वाले लोगों को पारंपरिक और मनोरंजक विधा 'नुक्कड़ नाटक' के जरिए जंगलों और प्रकृति के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
सजा जागरूकता का मंच
इसी अनूठे सिलसिले में 30 मई 2026 को लाड़कुई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम/बीट डोगलपानी और सिराड़ी में भव्य जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा विधिवत रूप से की गई।
ये रहे मुख्य अतिथि और अधिकारी
इस आयोजन में मध्य प्रदेश आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला सुनील बारेला मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनके साथ वन सुरक्षा समिति सिराली के अध्यक्ष प्रेम सिंह बारेला, मांगीलाल (पटेल), दौलत सिंह (अध्यक्ष), युवा नेता राम, परस राम सरियाम (फंडकी) और डोगलापानी वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष मूल्लू सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे। प्रशासनिक मोर्चे पर लाड़कुई के वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) प्रकाश चंद्र उईके सहित पूरा वन अमला और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।
नुक्कड़ नाटक की टोली ने बांधा समां
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के केंद्र भोपाल से आए नुक्कड़ नाटक मंडल के कलाकार रहे। कलाकारों ने अपनी अनूठी कला, मनमोहक लोकगीतों, ढोलक की थाप और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से वनांचल के ग्रामीणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खेल-खेल और अभिनय के जरिए कलाकारों ने ग्रामीणों के सामने कई यक्ष प्रश्न रखे और उनके जवाब भी दिए
वनों की अनिवार्यता: मानव जीवन और सांसों के चलने के लिए आखिर जंगल हमारे लिए क्यों आवश्यक हैं?
पेड़ कटने के दुष्परिणाम: अगर धरती से वनों का नामोनिशान मिट गया, तो आने वाली पीढ़ियों को क्या-क्या भुगतना पड़ेगा?
बीमारियों का खतरा: जंगलों के नष्ट होने और प्रदूषण बढ़ने से कितनी गंभीर बीमारियां हमें और हमारे बच्चों को घेर सकती हैं?
अस्तित्व पर संकट: वनों के बिना पृथ्वी पर मानव जीवन का अंत निश्चित है, इस कड़वे सच से ग्रामीणों को रूबरू कराया गया।
अधिकारियों ने की वनों को बचाने की अपील
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि निर्मला बारेला ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि वन केवल पेड़ों का समूह नहीं हैं, बल्कि यह हमारी संस्कृति और आजीविका का आधार हैं। उन्होंने वनों से मिलने वाले अनगिनत लाभों को गिनाते हुए जंगलों को सुरक्षित रखने की सामूहिक शपथ दिलाई। वहीं वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रकाश चंद्र उईके ने वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न वानिकी कार्यों, पौधारोपण योजनाओं और वन सुरक्षा नियमों की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने जनमानस से अपील की कि वे जंगलों को कटाई और आग से बचाने में वन विभाग के सच्चे पहरेदार बनें।