Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या को माघ अमावस्या भी कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से पितृ तर्पण, स्नान-दान और आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान देने और भगवान विष्णु व पितरों की पूजा करने से पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन व्रत का विशेष महत्व होता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक बल प्राप्त होता है।
Mauni Amavasya 2026 शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:32 बजे से 06:23 बजे तक
प्रातः संध्या: 05:58 बजे से 07:15 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 01:11 बजे तक
पितृ तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान मुहूर्त:
सुबह 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक
स्नान की विधि और नियम:
पवित्र नदी में स्नान करने वाले श्रद्धालु तीन डुबकी लगाएं
स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें
अर्घ्य देते समय इष्ट देव और पितरों का स्मरण करें
घर पर स्नान करने वाले लोग नहाने के जल में गंगाजल मिलाएं
स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, तिल और पुष्प डालकर सूर्य को अर्पित करें
अर्घ्य के पश्चात कुछ समय तक मौन धारण करें
मौन व्रत का महत्व:
मौनी अमावस्या पर कुछ समय या पूरे दिन मौन रहने से:
मानसिक शांति मिलती है
आत्मचिंतन का अवसर मिलता है
धार्मिक दृष्टि से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
मौनी अमावस्या पर क्या बाल धो सकते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन तेल, साबुन या शैंपू से बाल धोने से बचना चाहिए साधारण जल से स्नान करना उचित माना गया है। अत्यधिक श्रृंगार और विलासिता से दूरी रखें।
क्या दान करें क्या ना करें?
इस दिन अन्न, तिल, वस्त्र, कंबल, गुड़, घी और जरूरतमंदों को भोजन दान का विशेष महत्व है। मौनी अमावस्या 2026 आत्मशुद्धि, पितृ तृप्ति और पुण्य संचय का श्रेष्ठ अवसर है। सही मुहूर्त में स्नान-दान, पूजा और मौन व्रत से जीवन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इस दिन झूठ और विवाद से बचें, तामसिक भोजन न करें, नकारात्मक विचारों से दूर रहें और बाल और नाखून काटने से परहेज करें।