मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख और पावन पर्वों में से एक है। यह त्योहार भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन श्रद्धा से सूर्य पूजा करने पर सूर्य देव आरोग्यता और सकारात्मक ऊर्जा का आशीर्वाद देते हैं।
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य को अत्यंत शुभ माना जाता है। सामान्य रूप से इस दिन चावल और खिचड़ी का दान किया जाता है, लेकिन इस वर्ष एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जिसके कारण कुछ चीजों के दान से बचने की सलाह दी गई है।
मकर संक्रांति के दिन ही पड़ेगी षटतिला एकादशी
इस वर्ष 14 जनवरी को भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि देव की राशि मकर में गोचर करेंगे, इसी दिन मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा।
वहीं माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर 14 जनवरी को शाम 05 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस कारण मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो करीब 23 वर्षों बाद पड़ रहा है।
इस साल चावल और खिचड़ी का दान न करें
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, षटतिला एकादशी के संयोग के कारण इस बार मकर संक्रांति पर चावल, अन्न और खिचड़ी का दान करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन इन वस्तुओं का दान करने से शुभ फल की बजाय बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मकर संक्रांति पर इन वस्तुओं का करें दान
चावल और खिचड़ी को छोड़कर इस दिन निम्न वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है—
गुड़ – सूर्य देव को मजबूत करता है और मान-सम्मान बढ़ाता है
काले तिल और तिल के लड्डू – पाप नाशक माने जाते हैं, सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं
सब्जियां – पितृ दोष शांति में सहायक
गर्म कपड़े – पुण्य में वृद्धि
रुई और कपूर – नकारात्मक ऊर्जा का नाश
इन वस्तुओं का श्रद्धा भाव से दान करने पर पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।
सूर्य पूजा से मिलेगा विशेष फल
चूंकि मकर संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व है, इसलिए इस दिन प्रातः स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। ऐसा करने से स्वास्थ्य, आत्मबल और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।