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Groundwater Crisis in India: देश के 9 राज्यों में खाली हो रहे जल भंडार, रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

Groundwater Crisis in India: देश के 9 राज्यों में खाली हो रहे जल भंडार, रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

नई दिल्ली। Groundwater Crisis in India: देश में बढ़ती आबादी, तेज शहरीकरण और पानी के अंधाधुंध दोहन के कारण भूजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण की हालिया रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि भारत के नौ राज्यों में जमीन के नीचे मौजूद जल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पंजाब, राजस्थान और हरियाणा इस संकट के सबसे संवेदनशील क्षेत्र बनकर सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूजल दोहन की मौजूदा रफ्तार जारी रही तो आने वाले वर्षों में देश के कई हिस्सों को पीने के पानी और कृषि सिंचाई के लिए गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

दिल्ली में सुरक्षित भूजल क्षेत्र सीमित

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भूजल की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। सर्वेक्षण के अनुसार राजधानी के कुल 34 मूल्यांकन क्षेत्रों में से करीब 29 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में हैं, जबकि 32 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं। केवल लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र ही सुरक्षित श्रेणी में बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता शहरी विस्तार, निर्माण गतिविधियां और बढ़ती आबादी राजधानी के जल संसाधनों पर भारी दबाव डाल रही हैं।

पंजाब और राजस्थान में रिकॉर्ड स्तर पर दोहन

रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। राज्य के 153 मूल्यांकन क्षेत्रों में से लगभग 73 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। वहीं सुरक्षित श्रेणी में आने वाले क्षेत्रों की संख्या बेहद सीमित रह गई है। राजस्थान में भी हालात चिंताजनक हैं। राज्य के 302 मूल्यांकन क्षेत्रों में से 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सों में भूजल का अत्यधिक दोहन दर्ज किया गया है। हरियाणा में भी करीब 64 प्रतिशत क्षेत्र ओवर-एक्सप्लॉइटेड कैटेगरी में शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता और वर्षा जल संचयन की कमी इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं।

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा दबाव

देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी भूजल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 836 मूल्यांकन क्षेत्रों में से 67 प्रतिशत क्षेत्र फिलहाल सुरक्षित श्रेणी में हैं, लेकिन लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र अर्ध-गंभीर स्थिति में पहुंच चुके हैं। इसके अलावा 5.74 प्रतिशत क्षेत्र गंभीर और 6.46 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की विशाल आबादी को देखते हुए यह आंकड़े भविष्य के लिए चेतावनी संकेत हैं।

मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत की स्थिति

मध्य प्रदेश में फिलहाल स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई देती है, जहां लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र सुरक्षित श्रेणी में हैं। हालांकि विशेषज्ञ लगातार निगरानी और संरक्षण उपायों की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। दक्षिण भारत में तमिलनाडु की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। राज्य के 313 मूल्यांकन क्षेत्रों में से केवल 38.66 प्रतिशत क्षेत्र ही सुरक्षित पाए गए हैं, जबकि करीब 33 प्रतिशत क्षेत्र अत्यधिक दोहन की श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।

क्या है समाधान?

जल विशेषज्ञों के अनुसार भूजल संकट से निपटने के लिए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, जल संरक्षण की प्रभावी नीतियां लागू करना, कृषि में आधुनिक सिंचाई तकनीकों का उपयोग और शहरी क्षेत्रों में जल प्रबंधन को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत के कई हिस्सों में पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन सकती है। राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि देश के कई राज्यों में भूजल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं, जबकि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में भी खतरे की घंटी बज चुकी है। जल संरक्षण और सतत प्रबंधन ही इस संकट से बचने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।


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