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FCRA Amendment Bill 2026 पर बवाल: विपक्ष का हंगामा, कांग्रेस ने बुलाई आपात बैठक, जानें क्या है पूरा मामला...

FCRA Amendment Bill 2026 पर बवाल: विपक्ष का हंगामा, कांग्रेस ने बुलाई आपात बैठक, जानें क्या है पूरा मामला...

नई दिल्ली: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। संसद के भीतर और बाहर इस बिल पर जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक को ‘काला कानून’ बताते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजनीतिक तनाव बढ़ता देख केंद्र सरकार ने फिलहाल इस बिल को लोकसभा में पेश करने का फैसला टाल दिया है। हालांकि, इस मुद्दे पर सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा।

संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन

बुधवार को विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने सभी पार्टी सांसदों को तत्काल दिल्ली पहुंचने का निर्देश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी माहौल के बीच सरकार इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस का आरोप: “पारित नहीं होने देंगे बिल”

कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि वह किसी भी कीमत पर इस विधेयक को पास नहीं होने देगी। पार्टी का आरोप है कि यह कानून असंवैधानिक है और इससे खासकर अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े एनजीओ को नुकसान होगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह विधेयक ईमानदारी से काम कर रहे सामाजिक संगठनों पर दबाव बनाने का एक माध्यम बन सकता है।

अन्य विपक्षी दलों की भी तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी नेताओं ने भी बिल का विरोध किया है। सांसद हिबी ईडन ने इसे “ड्रैकोनियन लॉ” आरएसपी सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के खिलाफ बताया है। सांसद धर्मवीर गांधी ने कहा कि कानून निष्पक्ष होना चाहिए और किसी खास वर्ग को निशाना नहीं बनाना चाहिए

NGO सेक्टर पर असर की आशंका

विपक्ष का मानना है कि यह कानून देशभर में काम कर रहे हजारों एनजीओ पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा। खासतौर पर वे संगठन जो विदेशी फंडिंग पर निर्भर हैं, उनके संचालन में दिक्कतें आ सकती हैं।

आखिर क्या है FCRA Amendment Bill 2026?

यह विधेयक Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) 2010 में संशोधन का प्रस्ताव है। सरकार के अनुसार, इस बिल के प्रमुख उद्देश्य  विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना, फंड के दुरुपयोग को रोकना, जबरन धर्मांतरण और व्यक्तिगत लाभ के लिए फंड के इस्तेमाल पर लगाम हैं।

सरकार vs विपक्ष: दो अलग नजरिए

सरकार का पक्ष
विपक्ष का आरोप
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी
NGO और अल्पसंख्यकों पर दबाव
फंड के दुरुपयोग पर रोक
असंवैधानिक और दमनकारी कानून
राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला

फिलहाल क्या स्थिति है?

बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार ने फिलहाल इस विधेयक को लोकसभा में पेश नहीं किया है। लेकिन विपक्ष ने गुरुवार को भी बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में संसद में और हंगामे के आसार हैं। क्योंकि  FCRA Amendment Bill अब सिर्फ एक कानूनी प्रस्ताव नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक तरफ सरकार इसे पारदर्शिता का कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की पूरी संभावना है।


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