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Toxic Movie Review: यश ने मचाया तहलका, लेकिन 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म में उलझ गई कहानी

Toxic Movie Review: यश ने मचाया तहलका, लेकिन 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म में उलझ गई कहानी

Toxic Movie Review: साउथ सुपरस्टार यश ने करीब चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी की है। Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups को लेकर रिलीज से पहले ही जबरदस्त बज बना हुआ था। KGF: Chapter 2 के बाद यश को बड़े पर्दे पर देखने के लिए फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

फिल्म की लंबाई करीब 3 घंटे 14 मिनट है। इसमें यश का जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस, हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टाइलिश विजुअल्स देखने को मिलते हैं। हालांकि, कमजोर और बिखरी हुई कहानी फिल्म के अनुभव को कई जगह प्रभावित करती है।

कैसी है Toxic की कहानी?

फिल्म की कहानी 1940 के दशक के गोवा की पृष्ठभूमि में शुरू होती है। कहानी अपराध की दुनिया, ड्रग्स सिंडिकेट, रिश्तों, सत्ता और संघर्ष के इर्द-गिर्द घूमती है।

यश फिल्म में राया का किरदार निभा रहे हैं, जबकि नयनतारा गंगा के रोल में नजर आती हैं। गंगा अपने भाई राया के लिए बेहद सुरक्षात्मक है और चाहती है कि उसका भाई अपराध की दुनिया में अपना दबदबा कायम करे।

इसके बाद कहानी में कई किरदारों की एंट्री होती है और राया की जिंदगी में रिश्तों और अपराध की दुनिया के बीच संघर्ष बढ़ता जाता है। ड्रग्स सिंडिकेट से शुरू होने वाली कहानी आगे चलकर परिवार, पिता-पुत्र के रिश्ते और अपराधबोध जैसे भावनात्मक पहलुओं तक पहुंचती है। यही बदलाव फिल्म को कई जगह उलझा हुआ बना देता है। कहानी में इतने सारे किरदार और ट्रैक जुड़ जाते हैं कि दर्शक के लिए मुख्य कहानी से जुड़े रहना मुश्किल हो सकता है।

यश का जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस

Toxic Movie Review में सबसे मजबूत पक्ष यश की एक्टिंग और उनका स्क्रीन प्रेजेंस है। राया के किरदार में यश पूरी तरह छाए हुए हैं। उनके एक्शन सीक्वेंस, बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। खासकर हिंसक एक्शन दृश्यों में यश का अंदाज उनके फैंस को काफी पसंद आ सकता है। उनका किरदार फिल्म को लगातार स्टार पावर देता है।

नयनतारा से लेकर कियारा तक, कैसी है स्टारकास्ट?

फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में हैं। नयनतारा ने गंगा के किरदार में अच्छा प्रभाव छोड़ा है। उनका एक्शन अवतार भी देखने लायक है। वहीं कियारा आडवाणी नादिया की भूमिका में नजर आती हैं। उनका किरदार कहानी में भावनात्मक एंगल जोड़ता है, हालांकि इसे और बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता था। हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया का स्क्रीन टाइम सीमित है, लेकिन दोनों अपनी भूमिकाओं में असर छोड़ती हैं। रुक्मिणी वसंत, संजीदा शेख और अक्षय ओबेरॉय समेत सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा काम किया है।

एक्शन और VFX हैं फिल्म की ताकत

अगर कहानी को छोड़ दें तो फिल्म का एक्शन इसका सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है। बड़े स्तर पर डिजाइन किए गए एक्शन सीक्वेंस यश के स्टारडम को पूरी तरह सपोर्ट करते हैं। फिल्म का कैमरा वर्क भी शानदार है। कई दृश्यों में VFX का अच्छा इस्तेमाल किया गया है और बड़े पर्दे पर फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट प्रभावशाली नजर आता है।

संगीत ने किया निराश

फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो यह हिस्सा उतना प्रभावी नहीं लगता। रिलीज से पहले चर्चा में रहा 'तबाही' गाना जरूर ध्यान खींचता है, लेकिन बाकी गाने कहानी के बीच उतना प्रभाव पैदा नहीं कर पाते। फिल्म की लंबाई भी एक बड़ी समस्या बनती है। 3 घंटे 14 मिनट की अवधि में कहानी कई जगह धीमी और बिखरी हुई महसूस होती है।

क्लाइमैक्स में बढ़ती है उलझन

फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका क्लाइमैक्स कहा जा सकता है। कहानी जिस दिशा में आगे बढ़ती है, अंत तक पहुंचते-पहुंचते उसका फोकस काफी बदल जाता है। जहां दर्शक एक दमदार गैंगस्टर या ड्रग माफिया स्टोरी के क्लाइमैक्स की उम्मीद कर सकते हैं, वहीं फिल्म अचानक भावनात्मक और पारिवारिक पहलुओं की ओर मुड़ जाती है। इससे कुछ दर्शकों को अंत समझने में परेशानी हो सकती है।

क्या Toxic देखनी चाहिए?

अगर आप यश के जबरदस्त फैन हैं और बड़े पर्दे पर एक्शन, स्टाइल और स्टारडम देखना चाहते हैं, तो Toxic आपके लिए मनोरंजन का अच्छा विकल्प हो सकती है। लेकिन अगर आप एक कसी हुई, तार्किक और साफ कहानी वाली एक्शन फिल्म की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है। यश की दमदार परफॉर्मेंस और एक्शन के बावजूद कहानी की उलझन और लंबी अवधि फिल्म की बड़ी कमियां हैं।


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