छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक कथित वीडियो को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आरोप है कि वीडियो में थुलथुली मुठभेड़ में मारे गए नक्सली कैडरों को ‘शहीद’ के तौर पर पेश करते हुए उनकी गतिविधियों का महिमामंडन किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से इस तरह के ऑनलाइन कंटेंट को गंभीरता से देखा जा रहा है।
थुलथुली मुठभेड़ में मारे गए कैडरों का जिक्र
सोशल मीडिया पर प्रसारित बताए जा रहे वीडियो में थुलथुली मुठभेड़ से जुड़े नक्सलियों का उल्लेख किया गया है। इनमें नक्सली लीडर नीति सहित कुछ अन्य कमांडरों को कथित तौर पर सम्मानजनक और गौरवपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
वीडियो में इन कैडरों से जुड़ी पुरानी गतिविधियों को भी कथित रूप से सकारात्मक अंदाज में दिखाने का प्रयास किए जाने की बात सामने आ रही है। इसी वजह से वीडियो को लेकर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ सकती है।
नक्सली विचारधारा के प्रचार का आरोप
वीडियो को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि इसके माध्यम से नक्सली विचारधारा और सशस्त्र हिंसा से जुड़े कैडरों को महिमामंडित करने की कोशिश की गई है। सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नक्सल समर्थक सामग्री और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो सबसे पहले किस सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया था और इसके निर्माण या प्रसार के पीछे कौन लोग शामिल हैं। वीडियो की वास्तविकता और इसके स्रोत की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो के स्रोत की हो सकती है तकनीकी जांच
मामले में संबंधित वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की तकनीकी जांच की जा सकती है। जांच के दौरान मूल अकाउंट, वीडियो के प्रसार की कड़ी और इसे तैयार करने वाले लोगों की पहचान से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियां ऐसे कंटेंट की निगरानी इसलिए भी कर रही हैं ताकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नक्सली नेटवर्क के प्रचार या विचारधारा के प्रसार के लिए न किया जा सके।
नक्सल विरोधी अभियान के बीच ऑनलाइन गतिविधियां चुनौती
छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के साथ सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति पर भी जोर दिया जा रहा है। ऐसे समय में सोशल मीडिया के जरिए नक्सली गतिविधियों या विचारधारा को बढ़ावा देने वाले कथित कंटेंट को सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑनलाइन माध्यमों के जरिए मृत नक्सली कैडरों को नायक या ‘शहीद’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश को लेकर भी एजेंसियां सतर्क हैं। हालांकि, वायरल वीडियो से जुड़े आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगी।