सागर : पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा 3.0 लगातार पूरे जोश के साथ आगे बढ़ रही है। यात्रा के चौथे दिन की शुरुआत आज सागर के बालाजी मंदिर से शुरू हुई। जहां यात्रा को लेकर भक्त काफी उत्साहित नजर आए। इस दौरान जगहे जगहे पर श्रद्धालुओं ने बागेश्वर महाराज का धूमधाम के साथ स्वागत किया। तो वही यात्रा के टीकमगढ़ पहुंचने पर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जनता को संबोधित करते हुए “कोई अगड़ा-पिछड़ा नहीं, हम सब सनातनी हैं।
हिंदू की मदद के लिए आगे आना ही सच्ची एकता
शास्त्री ने जातिगत भेदभाव और ऊंच-नीच की भावना को समाप्त कर हिंदू समाज को एकजुट होने का संदेश देते हुए कहा कि कोई अगड़ा-पिछड़ा नहीं, हम सब सनातनी हैं। समाज में जातिगत अहंकार के बजाय आपसी सहयोग, भाईचारा और सामाजिक समरसता जरूरी है। मुसीबत के समय एक हिंदू का दूसरे हिंदू की मदद के लिए आगे आना ही सच्ची एकता है।
बेटियों और युवाओं को दिया संस्कारों का संदेश
इस दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवाओं को माता-पिता के सम्मान और पारिवारिक संस्कारों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा, “माना मोहब्बत बुरी नहीं है, मगर मां-बाप से जरूरी नहीं है।” इस संदेश के जरिए युवाओं से अपील की गई कि वे अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों और सम्मान को प्राथमिकता दें।
सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व समाज के लिए महत्वपूर्ण
यात्रा के दौरान बेटियों की सुरक्षा, सामाजिक जागरूकता और अपनी संस्कृति के प्रति सजग रहने जैसे विषयों पर भी पंडित जी ने बात की। साथ ही कहा - विभिन्न धार्मिक मान्यताओं के बीच आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की आवश्यकता भी समाज के लिए महत्वपूर्ण है।
GEN-Z के मुद्दे पर भी रखी बात
युवाओं और GEN-Z के मुद्दों पर चर्चा करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी मांगों और विचारों को रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही देशहित और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए अपनी बात रखने का संदेश दिया।
छतरपुर में होगा यात्रा का समापन
बता दें कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री की 500 किलोमीटर लंबी यह रथ यात्रा का कल यानि की 15 अक्टूबर को समापन छतरपुर में होने जा रहा है। पांच जिलों से होकर गुजरी। इस यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म, संस्कृति और हिंदू एकता का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है। तो वही इस यात्रा के आखिरी पड़ाव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है।